एमबीपीजी कालेज छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी और एनएसयूआई के अध्यक्ष प्रत्याशियों का मुकाबला इस बार अपनों के साथ होगा। सीधे तौर पर एबीवीपी का बागी मैदान में है और एनएसयूआई में बगावत है। एबीवीपी ठाकुर और ब्राह्मण के झगड़े से नहीं उबर पाई है।
एबीवीपी से घोषित प्रत्याशी के विरोध में ठाकुर लॉबी अपने प्रत्याशी को निर्दलीय चुनाव लड़वा रही है। एनएसयूआई में भी बगावत है। विगत एक दशक से एनएसयूआई के प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाने वाले नेता सोशल मीडिया में एबीवीपी प्रत्याशी के पक्ष में खड़े हो गए हैं।
हल्द्वानी कालेज का छात्रसंघ चुनाव छात्र संगठन ही नहीं बल्कि भाजपा और कांग्रेस नेताओं की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है। इस बार का छात्रसंघ चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए 2017 की विधानसभा का रिहर्सल भी है। एबीवीपी टिकट घोषित होने से पहले ही ठाकुर और ब्राह्मण के झगड़े में उलझी है।
एबीवीपी से विजय जोशी प्रत्याशी घोषित होने के बाद ठाकुर लॉबी ने नीरज मेहरा को निर्दलीय मैदान में उतारा है। नीरज को चुनाव लड़वाने वाली लॉबी पूर्व छात्र संघ नेताओं की है। इससे एबीवीपी कार्यकर्ता बंट गए हैं और आपस में एक-दूसरे का सिर फोड़ रहे हैं।
एनएसयूआई में भी हर्षित जोशी के चुनाव से बाहर होने के बाद कार्यकर्ता अलग-थलग पड़ गए हैं। एनएसयूआई ने हर्षित जोशी को प्रत्याशी बनाया था। हर्षित जोशी का परीक्षा परिणाम घोषित नहीं होने के कारण संगठन ने बागी अमन सुयाल को प्रत्याशी घोषित किया।
इससे हर्षित जोशी को चुनाव लड़वाने वाले पीछे हट गए। एनएसयूआई का भितरघात भी चुनाव से ठीक एक दिन पहले सार्वजनिक हो गया। पूर्व छात्रसंघ नेता एवं एनएसयूआई के प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाने वाले सुशील डूंगराकोटी ने शुक्रवार को फेसबुक पर एबीवीपी प्रत्याशी विजय जोशी के समर्थन में पोस्ट कर संगठन की गुटबाजी को उजागर कर दिया।
सुशील एनएसयूआई के रणनीतिकारों में शामिल रहे हैं। इस लिहाज से दोनों ही संगठनों के प्रत्याशियों का असली मुकाबला अपनों से ही होना है।