सब पढें सब बढें। यह नारा है सर्व शिक्षा अभियान का। शिक्षा के अधिकार से आप किसी को वंचित नही कर सकते वरना कानूनन अपराध की जद में आ सकते हैं। मगर लालकुआं थानार्न्तगत सांप कठानी खत्ता इन तमाम स्लोगन एवं नियमों को धता बता रहा है। खत्ते में रहने वाले लोगों के नौनिहाल पढ़ना तो चाहते हैं मगर इनकी जिम्मेदारी के लिए नियुक्त हैड टीचर ड्यूटी के बजाय लगभग नदारद रहती है। ऐसे में यह स्कूल एकमात्र शिक्षा मित्र के सहारे चल रहा है। अभिभावकों ने कई मर्तबा शिकायत उच्चाधिकारियों से की है मगर नतीजा सिफर रहा है।
नगर से लगभग चार किमी की दूरी पर लगभग 30 परिवारों की आबादी वाला सांप कठानी खत्ता लालकुआं के पश्चिम में बसा हुआ है। यहां के वाशिदों की आजीविका का साधन कृषि एवं पशुपालन है। संसाधनों के अभाव में जीवन यापन कर रहे खत्तावासियों की सुविधा के लिए पशु चिकित्सा केन्द्र व दुग्ध डेयरी स्थापित की गई है। यहां के नौनिहालों की शिक्षा के लिए ईजीएस शिक्षा गारंटी स्कीम सेंटर खोला गया था। जिसे वर्ष 2011 में उच्चीकरण कर प्राइमरी स्कूल में कनवर्ट कर दिया गया।
मगर जिम्मेदार लोग ही सरकारी योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं। मौजूदा समय में यहां निशात शाहीन हेड टीचर हैं। अभिभावकों के मुताबिक मैडम शाहीन स्कूल में ना के बराबर दर्शन देती है। अभिभावकों ने दावा किया कि मैडम जी मई माह में सिर्फ 2 तारीख को ही आयी थी। जब स्कूल का हाजिरी रजिस्टर देखा गया तो प्रमाणित भी हो गया। अभिभावकों के मुताबिक मैडम शाहीन अप्रैल में तो एक भी दिन स्कूल नही पहुंची।
\लालकुआं। भारत स्वच्छता अभियान के तहत प्रत्येक स्कूलों में शौचालय जरूरी है। मगर सांप कठानी में बच्चे खुले में शौच करने को विवश है। अभिभावकों ने बताया कि पूर्व में शौचालय निर्माण हेतु धनराशि स्वीकृत हुई थी मगर लापरवाही के चलते धनराशि वापस चली गयी।
लालकुआं। चार जर्जर बल्लियां गाड़कर बनाई गई छत को स्कूल बना दिया गया है। इसमें एक दरी बिछाकर बच्चों को बिठाया जाता है। यह हकीकत है प्रथामिक विद्यालय सांप कठानी की। आंधी, तूफान और चिलचिलाती धूप इन बच्चों का स्वागत करती है।
लालकुआं। संकुल प्रभारी नीमा पुनेठा का कहना है कि हेड टीचर मैडम निशात शाहीन 2 मई से अनुपस्थित होने की सूचना उन्हें नहीं है। उनके लगातार अनुपस्थित रहने पर उन्हें दर्जनों बार सुधार लाने की चेतावनी दी गयी है। श्रीमती पुनेठा का कहना है कि किसी भी स्कूल तक ड्यूटी करने पहुंचने का इंतजाम स्वत: करना होता है। जिसकी जिम्मेदारी विभाग की नही है। इस बावत विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
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