मौत के बहाने हजार हैं। कब, कहां और कैसे आएगी इंसान बेखबर होता है। हैड़ाखान रोड में कार से दोस्तों के साथ पसौली से काठगोदाम लौट रहा सूरज भी अपनी मौत से अनजान था। सड़क पर जलता लकड़ी का गिल्टा हफ्ते भर से शायद उसका ही इंतजार कर रहा था।
कार के टायर को आग से बचाने के चक्कर में सूरज की कार अनियंत्रित हो गई। ब्रेक मारने तक का समय नहीं मिला। अनियंत्रित कार टारजन दि वंडर कार की तरह हवा में उड़कर खाई में समा गई।
काठगोदाम से हैड़खान मंदिर तक सिंगल मार्ग है। कई जगहों पर संकरे मोड़ और सड़क टूटी है। ढलान और बरसाती रपटों पर ब्रेक मारना खतरे से खाली नहीं है। पखवाड़े भर से पसौली एवं आसपास के जंगलों में आग लगी है। करीब हफ्ते भर पहले जंगल की आग में लकड़ी का सूखा गिल्टा सुलगकर सड़क पर आ गया।
हैड़ाखान और आसपास के गांवों से हल्द्वानी के लिए आवाजाही करने वाले टैक्सी चालकों के मुताबिक गिल्टा काफी बड़ा था और लगातार जल रहा था। जलते हुए गिल्टे से बच बचाकर गाड़ी निकाल रहे थे। रविवार को गिल्टे का आखिरी ठूंठ बचा था और उसमें आग भड़क रही थी।
हल्द्वानी बड़ी मुखानी का सूरज अपने दोस्त आकाश और सचिन के साथ जलते हुए गिल्टे से बचते हुए पसौली गया। तीनों आइडिया कंपनी में नौकरी करते हैं। कुछ देर पसौली में रुकने के बाद सूरज और उसके दोस्त काठगोदाम लौट रहे थे।
कार सचिन बिष्ट की थी और वही चला रहा था। ढलान में मोड़ पर लकड़ी के जलते गिल्टे से टायर बचाने के चक्कर में कार अनियंत्रित हो गई। हड़बड़ाहट में सचिन ब्रेक लगाना तक भूल गया। करीब 50 फीट तक कार सड़क पर अनियंत्रित होकर किनारे पहुंच गई। सड़क की मेड कार के लिए जंपिंग ब्रेकर बन गई और कार हवा में उड़ गई।
जिस जगह से कार हवा में उछली, उसके ठीक नीचे सड़क घूमकर आई है। उड़ती कार ने नीचे की सड़क हवा में ही पार कर दी। कार ने करीब 100 मीटर नीचे पहली ठोकर मारी। ठोकर से कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें बैठा सूरज दरवाजा टूटने से छिटक गया।
उसका सर धड़ से अलग हो गया। सूरज के शव से करीब 200 मीटर नीचे कार पल्टियां खाते हुए टिन के डिब्बे में बदल गई। आकाश और सचिन उसमें फंसे रह गए। घटना स्थल और दुर्घटनाग्रस्त कार की हालत देख सभी दंग रह गए।