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नेताओं और अफसरों के मोबाइल हुए ‘नॉट रीचेबल’

Wed, 08 Apr 2015 02:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
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नेताओं और अफसरों की आजकल दिनचर्या बदल गई है। 24 घंटे मोबाइल ऑन रखने वाले नेताओं और अफसरों के फोन नॉट रीचेबल हैं। यह मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत नहीं, बल्कि निजी स्कूलों में एडमिशन की सिफारिश के लिए जनता जनार्दन के दबाव का कमाल है। नामचीन स्कूलों में एडमिशन की मारामारी है। स्कूलों के हाथ खड़े करने पर अभिभावक सिफारिश लगवाने के लिए नेताओं और अफसरों की शरण में हैं।
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हल्द्वानी के कान्वेंट स्कूलों में एडमिशन कराना टेढ़ीखीर है। नया सत्र शुरू होने से पहले ही सीटें फुल हो जाती हैं। इसके बाद अभिभावक बच्चों का एडमिशन कराने के लिए नेताओं और अफसरों के चक्कर काटते हैं। हल्द्वानी के कुछ नेता और अफसर आजकल अभिभावकों की बच्चों के एडमिशन की सिफारिश से परेशान हैं। इन लोगों ने कई बच्चों के एडमिशन करवा भी दिए हैं, लेकिन सिफारिश का सिलसिला थम नहीं रहा है।

नेता किसी को नाराज भी नहीं करना चाहते हैं। अधिकतर सिफारिश करने वाले उनके ही कार्यकर्ता या फिर परिचित हैं। यही हाल अफसरों का भी है। अफसरों के नाते-रिश्तेदार एडमिशन के लिए संपर्क कर रहे हैं। इससे बचने के लिए नेताओं और अफसरों को अपना मोबाइल फोन ही नॉट रीचेबल करना पड़ रहा है। सुबह और शाम को कुछ समय के लिए फोन खुल रहा है। मोबाइल अलर्ट पर मैसेज देखकर जरूरी फोन का जवाब दे रहे हैं।
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फोन नॉट रीचेबल होने पर अभिभावक नेताओं के घर तक पहुंच रहे हैं, जहां सुबह से लेकर रात तक अभिभावकों का जमावड़ा लग रहा है। नेता हैं कि अभिभावकों के हाथ नहीं आ रहे हैं। एक नेताजी ने तो कुछ दिनों से हल्द्वानी में अपने घर जाना ही छोड़ दिया है। यह नेताजी सुबह नैनीताल से हल्द्वानी आते हैं और शाम को नैनीताल लौट जाते हैं।
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