नदियों में अवैध खनन और जमीन को खोखला करने से लेकर मनमाने तरीके से खनिज का भंडारण करने वाले बेखौफ है। कार्रवाई के नाम पर कुछ पर जुर्माना तो खूब ठोका गया, लेकिन नियमों और कथित तौर पर सेटिंग का लाभ उठाकर जुर्माने वसूला ही नहीं गया।
कुमाऊं में करीब सवा अरब रुपये की जुर्माना राशि वसूली जानी है। सरकारी अफसर केवल फाइल चला रहे हैं और सफेदपोशों के संरक्षण की आड़ में अवैध खनन करने वाले दिन-रात नदियों का सीना चीर रहे हैं।
कुमाऊं में छह साल में खान विभाग ने प्रशासन के सहयोग से खनिज, मिट्टी, खड़िया आदि के अवैध खनन और भंडारण करने वालों के खिलाफ ताबड़तोड़ छापे मारे। नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जिले में करीब चार महीने पहले ही वन निगम ने ताकतवर स्टोन क्रशरों पर 35 करोड़ का जुर्माना लगाया।
लेकिन यह जुर्माना आज तक नहीं वसूला गया। नैनीताल जिले में ही 85 लोग ऐसे हैं, जिन पर अवैध खनन करने पर जुर्माना लगाया गया, लेकिन उन्होंने नियमों, कानून को ठेंगा दिखाते हुए आज तक एक धेला भी जमा नहीं किया।
इन लोगों के खिलाफ 11.37 करोड़ की जुर्माना जमा नहीं करने पर आरसी काटी गई है। इस तरह अगर दोनों आरसी और जुर्माने की राशि को जोड़ दिया जाए तो 46.37 करोड़ रुपये सीधे-सीधे वसूले जाने हैं।
नैनीताल जिले की बात करें तो 2010 से 2015 की अवधि का करीब 50 करोड़ का जुर्माना जमा होना बाकी है। बाकी अनुमान है कि ऊधम सिंह नगर जिले और अन्य जिलों में 30 करोड़ तक का और बकाया हो सकता है।
‘जुर्माना लगाने की संस्तुति डीएम को भेजी जाती है। अगर व्यक्ति सहमत नहीं है, तो वह डीएम, कमिश्नर और शासन से चरणबद्ध तरीके से अपील कर सकता है। वह कोर्ट भी जा सकता है। इस कारण भी कई बार जुर्माना लंबित रहता है। कई मामलों में जुर्माना स्टे वाले केसों पर भी नहीं वसूला गया है। कुमाऊं में 35 करोड़ का जुर्माना वसूलने के लिए छह महीने की अवधि में आरसी भी काटी गई है। इसमें कितना जमा हुआ है, इसकी जानकारी नहीं है।
- राजपाल लेघा, उप निदेशक खनन।