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Nainital News: जब स्कूलों ने फीस बढ़ा ही ली तो कैसे लगाएंगे मनमानी पर लगाम

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हल्द्वानी। शहर में निजी स्कूलों में छात्र संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका लाभ उठाते हुए निजी स्कूल संचालक हर साल नया सत्र शुरू होते ही शुल्क वृद्धि कर देते हैं। शहर के स्कूलों में इस बार भी दस से पंद्रह फीसदी तक शुल्क वृद्धि की गई है। अब जब शुल्क वृद्धि कर दी गई और अभिभावक बच्चों का दाखिला करा चुके हैं तो विभाग कैसे निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाएगा।
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कुमाऊं के सबसे बड़े महानगर हल्द्वानी में दो सौ से अधिक निजी स्कूल हैं जबकि यहां की आबादी पांच लाख के करीब है। इनमें एक लाख से अधिक छात्र-छात्राएं हैं जो निजी स्कूलों में अध्ययनरत हैं। अधिकांश स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अभिभावक दस से पंद्रह फीसदी तक बढ़ा हुआ शुल्क भी अदा कर चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि कई प्रतिष्ठित निजी स्कूलों ने तो बीस फीसदी तक शुल्क वृद्धि की है। इन स्कूलों में प्रतिष्ठित परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं, जो आसानी से बढ़ा हुआ शुल्क अदा कर देते हैं। बड़े स्कूलों की देखादेखी छोटे स्कूल भी शुल्क वृद्धि करने से नहीं चूकते।

शुल्क वृद्धि तो हर साल होती है लेकिन सुविधाओं में इजाफा नहीं किया जा रहा। अब भी शहर के कई निजी स्कूलों के पास खेल के मैदान नहीं है। वहां आधारभूत सुविधाओं का टोटा है। बच्चों को लाने-ले जाने के लिए पर्याप्त संख्या में बसें नहीं हैं। कई स्कूलों की बसों की स्थिति खराब है। कई स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। बड़े स्कूलों को छोड़ दें तो छोटे निजी स्कूलों में सुरक्षा बंदोबस्त तक नजर नहीं आते हैं। कई स्कूल बगैर मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इतना होने के बाद भी शिक्षा विभाग की ओर से हर प्रशासनिक अधिकारियों को साथ लेकर नया सत्र शुरू होते ही बैठकें कर निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के दावे किए जाते हैं लेकिन धरातल पर यह सब नजर नहीं आता है। ऐसे में सवाल उठता हैं कि जब प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अभिभावक शुल्क अदा कर चुके हैं तो कैसे शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाएगा। बृहस्पतिवार को स्कूल संचालकों के साथ हुई कार्यशाला भी कितनी कारगर होगी, यह भी सवाल बन गया है।
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