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Nainital News: रास्ते में आई मुश्किल तो राह ठुकरा दी गजराज ने...

Wed, 12 Aug 2026 12:08 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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रामनगर। हाथी कॉरिडोर में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और वाहनों की लगातार आवाजाही का असर हाथियों की चहलकदमी पर पड़ने लगा है। कॉरिडोर में बढ़ते व्यवधान के चलते हाथियों ने अपनी पारंपरिक यात्रा को छोटा कर दिया है। पहले नेपाल तक पहुंचने वाले वाले हाथी अब व्यवधान वाले क्षेत्रों से दूरी बनाते हुए कम दूरी के रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार, हर साल गर्मी के मौसम में हाथी राजाजी नेशनल पार्क से नेपाल तक सफर तय करते थे। इसके लिए वह कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से होते हुए रामनगर समेत कई वन प्रभागों में अपने पारंपरिक कॉरिडोर के माध्यम से एक जंगल से दूसरे जंगल में पहुंचते थे। कॉरिडोर में व्यवधान बढ़ने के कारण अब हाथियों का नेपाल तक जाना कम हुआ है और वे रास्ते में ही अपना मार्ग बदल रहे हैं।


दो शोधों में नए, पुराने मार्गों की हो रही पहचान
रामनगर। हाथियों के घटते कॉरिडोर और बदलते आवागमन पर इस साल भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) ने दो अलग-अलग शोध किए हैं। माना जा रहा है कि हाथी पुराने रास्तों की जगह नए मार्गों पर आवाजाही कर रहे हैं। हाथियों के मौजूदा कॉरिडोर के साथ ही उनके इन्हीं नए रास्तों का अध्ययन किया जा रहा है। शोध रिपोर्ट आने के बाद हाथियों की वर्तमान आवाजाही और उनके बदले हुए मार्गों के बारे में और जानकारी मिल सकेगी।
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प्रदेश में दो हाथी कॉरिडोर हुए समाप्त
रामनगर। टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन के पूर्व सदस्य एजी अंसारी ने बताया कि 2008 में हुई वन विभाग उत्तराखंड और वाल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से हाथी कॉरिडोर की गणना की थी। 2008 की गणना के दौरान गौला हाथी कॉरिडोर शहरीकरण के चलते खत्म हो गया था। इसके बाद इसे 2008 की हाथी कॉरिडोर की गणना से हटा दिया गया था। वहीं 2023 की कॉरिडोर की गणना में दक्षिण पतली दून कॉरिडोर को भी नई सूची से हटा दिया है।
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प्रदेश में बचे हैं 10 कॉरिडोर

1. कांसरो-बर्कोट (लालटप्पड़) कॉरिडोर
2. मोतीचूर-बर्कोट (टीनपानी) कॉरिडोर
3. मोतीचूर-गोहरी कॉरिडोर
4. चीला-मोतीचूर कॉरिडोर
5. रवासन-सोनानदी (अपर आर्म) कॉरिडोर
6. मालानी-कोटा (कोसी) कॉरिडोर
7. चिल्किया-कोटा (कोसी) कॉरिडोर
8. फतेहपुर-गदगदिया (निहाल-भाखड़ा) कॉरिडोर
9. किलपुरा-खटीमा कॉरिडोर
10. गोराई-टांडा (गोला) कॉरिडोर
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बीते कुछ सालों में हाथी कॉरिडोर में मानवीय दखल, वाहनों की आवाजाही, बढ़ते शहरीकरण समेत अन्य कारणों व्यवधान उत्पन्न हुआ है। ऐसे में हाथी अपने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अपना सफर को छोटा कर रहे हैं। कभी-कभार किसी टस्कर के ही नेपाल तक पहुंचने की सूचना मिलती है। - संजय छिमवाल, वन्यजीव प्रेमी, रामनगर।
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सीटीआर में हाथी कॉरिडोर में बदलाव, भोजन की उपलब्धता, मानवीय हस्तक्षेप से आ रहे बदलाव पर शोध किए गए हैं। शोध रिपोर्ट आने के बाद ही हाथियों के व्यवहार और रहन-सहन में आ रहे बदलाव का पता चल सकेगा। - डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर।
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