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Nainital News: यह कैसा एसएनसीयू, केवल एक पाली में होंगे बच्चे भर्ती

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हल्द्वानी महिला अस्पताल में बना  एसएनसीयू।       अमर उजाला
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महिला अस्पताल का हाल ==


माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों के हाल खराब हैं। महिला अस्पताल का सिक नियो नेटलकेयर यूनिट (एसएनसीयू) स्टाफ न होने के कारण बंद कर दिया गया था, शनिवार को जैसे-तैसे खोला गया तो उसमें तीन शिफ्ट की जगह केवल एक शिफ्ट में बच्चों को भर्ती करने का फैसला किया गया है। इसमें भी केवल पीलिया (फोटो थेरेपी) वाले एक से दो बच्चों को रखा जाएगा। ऐसे में एसएनसीयू कितना संचालित हो पाएगा? यह खुद समझा जा सकता है। संबंधित अवधि के बाद अगर बच्चे को संबंधित इलाज की जरूरत होगी तो अभिभावकों को दूसरे अस्पताल की दौड़ लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।
महिला अस्पताल में एसएनसीयू की क्षमता 12 बेड की है, जहां गंभीर बच्चों को भर्ती किया जाता है। यहां एक शिफ्ट में दो नर्स की तैनाती का नियम है, पर काफी समय से केवल एक को तैनात कर काम चलाया जा रहा था। हाल में यहां पर तैनात छह नर्स का चयन नियमित भर्ती में हो चुका है, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल को छोड़ दिया है। तीन में एक नर्स बीमार है, जबकि एक अन्य अवकाश पर हैं। ऐसे में स्टाफ कम होने पर एसएनसीयू को बंद कर दिया गया था। बाद में अस्पताल प्रबंधन ने शनिवार को एसएनसीयू को खोलने का फैसला किया। पर यह खोलना भी न खोलने जैसा ही है।
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दो शिफ्ट में कोई नहीं मिला
हल्द्वानी। अमर उजाला की टीम सुबह की शिफ्ट में एसएनसीयू पहुंची तो यह बंद मिला। दोपहर की शिफ्ट में एक नर्स तैनात मिली। उस समय कोई भी बच्चा एसएनसीयू में नहीं था। रात 8:30 बजे फिर टीम पहुंची, तो वहां एसएनसीयू का बाहर का गेट खुला था, लेकिन वार्ड के अंदर के गेट पर ताला लगा था। आवाज देने पर भी कोई नहीं मिला। बाद में अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने बताया कि एसएनसीयू खुला है, पर कोई बच्चा भर्ती नहीं है। यहां पर किसी स्टाफ की तैनाती है? इसको लेकर कोई जवाब नहीं मिल सका।
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अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
हल्द्वानी। इस संबंध में महिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. उषा जंगपागी ने बताया कि एसएनसीयू के लिए नर्सिंग स्टाफ के 10 पद स्वीकृत हैं, इनमें छह नर्स सेवा छोड़ चुकी हैं। बीच में किसी तरह काम चलाया गया था, बाद में मुश्किल होने पर बंद किया गया। अब फिर से शुरू किया गया। इनमें केवल दोपहर की शिफ्ट में ही बच्चे भर्ती हो सकेंगे। यह भी एक से दो ही भर्ती करने की व्यवस्था हो पाएगी। इसमें भी पीलिया वाले बच्चों को रखा जाएगा। बाकी प्री-मेच्योर या अन्य गंभीर बच्चों को भर्ती नहीं किया जा सकेगा।
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