500 और 1000 के नोट का क्या होगा, इससे केवल धनपति ही नहीं बल्कि मेहनतकश भी परेशान दिखे। उनका का कामकाज भी तुलनात्मक तौर पर कम हुआ। पेट्रोल पंप पर बुधवार को भी बड़ी संख्या में लोग वाहन की टंकी फुल कराने के लिए पहुंचे साथ में प्लास्टिक की बोतल तक लाए थे।
प्रेस कर जीविका चलाने वाले दिवाकर कहते हैं कि कई लोगों ने पूछ लिया है कि 500 का छुट्टा है? इसके बाद प्रेस कराते हैं। हमने कहा.. अरे भई एक-दो तो हम ही बैंक में जमा कर देंगे। देवलचौड़ के पास मकान बना रहे राज मिस्त्री तस्लीम कहते हैं कि मजदूरी को घर पर ही रख देते हैं।
सुबह काम पर आना होता है। यही जमा पूंजी है... बैंक में खाता भी नहीं है। अब उन पैसों का क्या होगा। बड़ी मेहनत कर जमा किया था। कबाड़ खरीदने वाले अखलाख कहते हैं कि कुछ किलोग्राम पेपर, थोड़ा बहुत सामान आदमी बेचता है, तो वह सैकड़ों में हो जाता है।
अब सभी कह रहे हैं कि फुटकर हो तो बताओ...। आज खरीद फरोख्त कम ही हुई है। यह फैसला कैसा है? पूछने पर कहते हैं कि हमें तो कबाड़ खरीदना है.. बाकी दूसरे लोग जानें। दूसरी तरफ पेट्रोल पंप पर भी खूब भीड़ लगी थी। देवलचौड़ स्थित पेट्रोल पंप पर कार्यरत दिलीप कहते हैं कि पेट्रोल देने में दिक्कत नहीं है बस समस्या छोटे नोट को लेकर आ रही है। हर कोई बड़ा ही नोट दे रहा है।