मेड़, खेत में कई वनस्पति लगी होती हैं, जिन्हें कई बार लोग खरपतवार या बेकार समझते हैं, पर इसमें से कई वनस्पतियां औषधी गुणों से भरपूर हैं, जिनसे इलाज सटीक तरीके से होता है। ऐसे ही वनस्पतियों और पूर्वजों के पारंपरिक ज्ञान से लोहरियासाल तल्ला के किसान कैलाश सिंह महरा लोगों का सालों से निशुल्क इलाज कर रहे हैं। हर साल 500 से 600 लोग कई असाध्य रोगों का इलाज कराने के लिए उनके पास पहुंचते हैं।
कैलाश सिंह बताते हैं कि उनके दादा एवं पिता भी लोगों का इलाज जंगल और खेतों में मिलने वाली वनस्पतियों से करते थे, लेकिन वह किस रोग में कौन से पत्ती, पौधा, पेड़ कारगर होगा बताते नहीं थे। ऐसे में उन्होंने चोरी-छिपे उनसे यह पारंपरिक ज्ञान सीखा। माना जाता है कि चार महिलाओं में एक महिला और 11 आदमियों में एक आदमी आधे सिर के असहनीय दर्द से पीड़ित होता है।
कैलाश कहते हैं कि इसका एक छोटा सा इलाज है, जिसमें एक वनस्पति के रस को डेढ़ दाने के साथ मिलाकर दर्द के उल्टी तरफ नाक में डाला जाता है, उससे यह दर्द दूर हो जाता है। पत्थर चट्टा की जड़ को कूट कर गुड़ से मिलाकर खाने से कालरा जैसी पेचिस दूर हो जाती है। इसी तरह हल्दी की पीठिया, चीनी और भांग पीसकर मिलाने से गहरा से गहरा घाव ठीक हो जाता है। वह कहते हैं कि खेत के मेड़ पर भुगुनिया बिरादरी का पौधा होता है, जिस पर पीले रंग का फूल होता है।
इसका स्वाद पिपरमिंट की तरह होता है जो दांत का दर्द दूर कर देता है। खेत किनारे पर ही भुगुनिया घास को मसल कर बांध देने से रक्तस्राव रुक जाता है। इसी तरह बुरांश से उल्टी, दस्त की बीमारी दूर की जाती है।
पशुओं का इलाज
कैलाश सिंह पशुओं का इलाज भी आसपास की जड़ी-बूटियों से करते हैं। वह पशुओं की आम बीमारी खुरपका का इलाज आंख के पेड़ की जड़ की मिट्टी का लेप लगाने से करते हैं।
इन खास रोगों के इलाज को आते हैं लोग
- आधे सिर का दर्द (माइग्रेन)
- पीलिया
- नाभ हट जाना
- दांत का दर्द
- गहरा जख्म हो जाना
- चोट लगने पर खून नहीं रुकना
- पेट खराब होना