कोसी और शिप्रा का पानी भी पीने योग्य नहीं । नदियों के पानी में मलमूत्र मिला है। पानी में बैक्टीरिया मिलने के कारण पीलिया समेत पेट संबंधी अन्य बीमारियां हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पानी के परीक्षण की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गौला से भी सैंपल लिये थे। गौला के पानी में भी बैक्टीरिया मिले थे।
स्वास्थ्य विभाग ने रामनगर में पम्पापुरी, भरतपुरी में कोसी से सैंपल लिए थे। जबकि ढिकुली में प्राकृतिक स्रोत के पानी का सैंपल लिया गया था। गरमपानी में शिप्रा नदी का पानी लिया गया था।
जबकि भुजियाघाट में प्राकृतिक स्रोत का पानी लिया था। पानी के नमूने नैनीताल जल संस्थान की लैब में भेजे गए थे। जुलाई अंतिम सप्ताह में आई रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के कान खड़े कर दिए हैं।
उक्त सभी जगह का पानी पीने योग्य नहीं है। पानी में जानवरों का मल मूत्र मिला है। साथ ही बैक्टीरिया भी मिले हैं। उक्त पानी पीने से पीलिया, पेट संबंधी अन्य बीमारियों के अलावा ब्लड प्रेशर हो सकता है।
बीमारी होने के कारण इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होगा और मानसिक रोग भी हो सकते हैं। स्वास्थ्य महकमे ने जल संस्थान को नोटिस जारी कर पानी को दो बार फिल्टर करने और क्लोेरीनेशन करने को कहा है।
साथ ही प्रति सप्ताह सैंपल लेकर पानी की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। नगर पालिका और निगम भी पानी के नमूनों की जांच कर प्रत्येक सप्ताह रिपोर्ट देगा।
ज्योलीकोट का पानी सबसे अच्छा
हल्द्वानी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ज्योलीकोट, दोगांव में प्राकृतिक स्रोत के पानी के नमूने लेकर जांच कराई थी। ज्योलीकोट का पानी सबसे अच्छा और शुद्ध मिला है। जबकि दोगांव में प्राकृतिक स्रोत से आ रहा पानी भी साफ है।