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असिस्टेंट प्रोफेसर मार्केटिंग के पद पर हुई नियुक्ति निरस्त

Fri, 07 Oct 2016 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
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न पिता का रसूख काम आया और न ही पूर्व कुलपति डा. मंगला राय का तुगलकी फरमान। पंतनगर विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर मार्केटिंग के पद पर नियुक्ति किए गए डॉ. जयंत गौतम की नियुक्ति को कुलाधिपति ने निरस्त कर दिया है।
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कुलाधिपति ने स्क्रीनिंग कमेटी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कुलाधिपति ने अभी सिर्फ एक मामले को निस्तारित किया है। पंतनगर विश्वविद्यालय में नियुक्ति से जुड़े अभी कई अन्य विवादास्पद मामले भी हैं।  

पंतनगर विवि में असिस्टेंट प्रोफेसर मार्केटिंग के पद पर नियुक्ति के मामले को अमर उजाला ने 28 सितंबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उक्त पद के लिए जुलाई 2015 में विज्ञापन निकला था। 11 सितंबर 2015 को नियुक्ति के लिए साक्षात्कार हुए और 19 नवंबर 2015 को डॉ. जयंत गौतम को नियुक्त किया गया।
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इस पद के लिए डॉ. सतीश चंद्र पंत ने भी आवेदन किया था। नियुक्ति के लिए यूजीसी एवं आईसीएआर की अर्हता थी कि अभ्यर्थी नेट पास होना चाहिए। नेट न होने पर पीएचडी रेग्युलेशन 2009 के अनुसार होनी चाहिए एवं साथ में नास (नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेस) रेटिंग के दो पेपर भी होने जरूरी थे।

सूत्रों की मानें तो डॉ. जयंत नेट पास नहीं थे और नास रेटिंग का एक भी पेपर नहीं था। डॉ. गौतम का एक भी रिसर्च पेपर मार्केटिंग फील्ड से नहीं है। इस मामले डॉ. सतीश चंद्र पंत ने नवंबर 2015 में न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट ने कुलाधिपति को निर्देश दिए कि छह माह के भीतर मामले को निस्तारित करें। नौ माह पूरे होने के बाद भी मामला लटका हुआ था। पंतनगर विवि में हुई अनियमितता को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।

कुलाधिपति डॉ. केके पाल ने डॉ. पंत के सभी आरोपों को सही मानते हुए डॉ. गौतम की नियुक्ति निरस्त कर दी है और नए सिरे से चयन प्रक्रिया पुन: कराने के आदेश दिए हैं। ये आदेश चार अक्तूबर को जारी किए गए।
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