वीरेंद्र सती सुशीला तिवारी अस्पताल में ड्रेसिंग का काम करता है। उपनल के माध्यम से उसे रखा गया था। वार्ड में एक महिला के साथ छेड़खानी करने पर उसे ओपीडी में ड्यूटी दी गई थी। सूत्रों के अनुसार 2013 में ही सती ने 18 रुपए की जांच के लिए मरीज से 18 सौ रुपए लिए थे।
सती ने रसीद में हेराफेरी की थी। मामले की जांच में हेराफेरी का खुलासा हुआ था। हेराफेरी सामने आने पर प्राचार्य डा. आरसी पुरोहित ने चार माह के लिए उसे नौकरी से निकाल दिया था। चार माह बाद राजनीतिक दबाव के चलते उसे फिर से नौकरी पर रख लिया गया। सवाल यह है कि राजनीतिक दबाव किसका था और ऐसे आदमी को नौकरी पर क्यों रखा गया।
घटना अत्यंत शर्मनाक है। ऐसे व्यक्ति को किसी भी स्थिति में नौकरी पर नहीं रखा जा सकता है। इस मामले की जांच कराई जाएगी कि किसके दबाव में दोबारा नौकरी दी गई। प्राचार्य को हिदायत दी जाएगी कि दोबारा ऐसे व्यक्ति को अस्पताल में घुसने नहीं दें। - डा. इंदिरा हृदयेश, वित्त मंत्री
पुराने मामले में नौकरी से निकालने पर आरोपी के माता-पिता आए थे। माता-पिता के गिड़गिड़ाने के बाद दोबारा नौकरी दी थी। आज की घटना के बाद उपनल को कर्मी तत्काल वापस लेने को कहा गया है।
- डा. आरसी पुरोहित, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज