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वीरभट्टी के घाटी पुल पर 20 से दौड़ेंगे वाहन

Mon, 30 Oct 2017 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो  ज्योलीकोट (नैनीताल)।
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वीरभट्टी के घाटी पुल पर 20 से दौड़ेंगे वाहन - फोटो : अमर उजाला
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वीरभट्टी पुल के धंसने के बाद प्रशासन हरकत में दिखाई देने लगा है। रविवार को डीएम दीपेंद्र चौधरी निरीक्षण को पहुंचे तो घाटी पुल (वैली ब्रिज) पर 20 नवंबर से आवागमन शुरू होने का दावा किया गया। पहले इसके लिए 15 नवंबर की समयावधि तय की गई थी। डीएम ने कहा कि पुल टूटने की जांच एडीएम बीएल फिरमाल करेंगे।
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उनसे जल्द जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। उन्होंने एनएच के अधिकारियों से पुल के निर्माण में तेजी लाने और सिंचाई विभाग की ओर से बलियानाला में किए जा रहे सुरक्षा कार्यों को तत्काल रोकने के भी आदेश दिए। 

डीएम ने बताया कि वीरभट्टी में बनने वाले घाटी पुल में 16.5 मैट्रिक टन भार तक के वाहन आवागमन कर सकेंगे। वीरगति को प्राप्त पुल की लंबाई 39 मीटर थी जबकि नए पुल की लंबाई 48 मीटर होगी। यह पुल अन्य पुलों की तरह बी क्लास भार क्षमता का होगा।
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डीएम ने एनएच के ईई महेंद्र कुमार से पुल की प्रगति और किए गए इंतजामों की जानकारी ली। स्थानीय लोगों ने पुल टूटने के लिए एनएच के अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार बताया। जिला पंचायत सदस्य डॉ. हरीश बिष्ट ने कहा कि यदि तय समयावधि में यातायात सुचारु नहीं होता है तो जनता को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

सभासद डीएन भट्ट, मनोज कांडपाल, हरगोविंद रावत, जितेंद्र पाठक, महेश जोशी, पुष्कर जोशी आदि ने लोगों को हो रही दिक्कतों को दूर करने के लिए तय समय पर कार्य पूर्ण करने की जरूरत बताई।  

जब बगलें झांकने लगे ईई 

एनएच के अधिकारी नए निर्माण के लिए दिनरात कार्य करने के दावे  कर रहे हैं। लेकिन रविवार को डीएम  के आगमन के सामने असलियत तब सामने आ गई। जब दोपहर 12 बजे काम में लगी जेसीबी और पोकलेंड मशीनें कार्यस्थल पर नहीं थी। डीएम के जवाब मांगने पर ईई महेंद्र कुमार बगलें झांकने लगे। आनन-फानन में बलियानाला में मशीन चालकों को बुला कर उन्हें काम पर लगाया गया।

बलियानाला में हो रहे काम की जांच का भरोसा

बलियानाला में सिंचाई विभाग द्वारा 40 करोड़ रुपये के कराए जा रहे सुरक्षा कार्यों में धन के दुरुपयोग और कार्य की घटिया गुणवत्ता की शिकायत पर डीएम दीपेंद्र चौधरी ने जांच कराने और कार्यवाही का भरोसा दिया।

बलियानाला संघर्ष समिति के अध्यक्ष डीएन भट्ट, सचिव इंदर नेगी, महेश जोशी, जितेंद्र पाठक, पुष्कर जोशी आदि ने बताया कि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत और ठेकेदारों की साठगांठ से उन स्थलों में कार्य कराया जा रहा है जो कि कम खतरे वाले हैं, जबकि नैनीताल के अस्तित्व के लिए खतरा बनी पहाड़ियों से लगे भूस्खलन प्रभावित इलाके को नजरंदाज किया जा रहा है। जिससे भविष्य में कराए जा रहे कार्य ध्वस्त, निष्प्रयोज्य हो जाएंगे। 
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