पिथौरागढ़। सीमांत जिले में नार्थ अमेरिकन ट्राउट हैथरी के सफल प्रयोग के बाद वियतनामी मुरैल मछली का उत्पादन किया जाएगा। पहले चरण में कनालीछीना विकासखंड के डुंगरी गांव और बेड़ीनाग ब्लाॅक के पीपलतड़ में मछली का उत्पादन किया जाएगा।
वियतनामी कोई और मुरैल मछली की विशेषता है कि इसका उत्पादन छोटे टैंकों में भी आसानी से हो सकता है। इन्हें पालने के लिए ज्यादा बड़े टैंक की जरूरत नहीं है। ये मछली कैट फिश (सिंगल काटा) की तरह जल्दी बढ़ने लगती है।
इस मछली की मांग मैदानी और पहाड़ी जिलों में अच्छी है। यहां मछली के उत्पादन के बाद इनको पैकेजिंग के बाद बाहरी राज्यों को भेजा जाएगा। अगर यह प्रयोग सफल हो जाता है तो मछली उत्पादकों की आय में सुधार होगा।
सहायक मत्स्य निदेशक डॉ. रमेश चलाल का कहना है कि मत्स्य पालकों की आय में सुधार करने और उन्हें बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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मछली उत्पादन में रुचि दिखा रहे हैं लोग
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में मत्स्य पालकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में 25 से अधिक गांवों में मछलियों का उत्पादन किया जा रहा है। मछली उत्पादन से 750 लोग जुड़े हैं। मत्स्य विभाग समय-समय पर मत्स्य पालकों को ट्रेनिंग, मछली के बीच आदि उपलब्ध कराता रहता है। संवाद