उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि विद्यार्थी अपने लक्ष्य को संकीर्ण व आत्मकेंद्रित बनाने के बजाय समाज, मानवता तथा राष्ट्र के लिए कुछ बेहतर करने के अनुरूप बनाएं। आज भी हम उन्हें ही याद करते हैं, जिन्होंने समाज के लिए कार्य किया और इसमें अपना जीवन समर्पित कर दिया।
शेरवुड कॉलेज के 156वें स्थापना दिवस पर विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें बिना शर्त पूर्ण राष्ट्रवाद को स्वीकार करना होगा। भारत ऐसा अनूठा राष्ट्र है जिसकी 5000 वर्षों की सांस्कृतिक विरासत है। शिक्षा ईश्वर का वरदान है। यदि आपको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है, तो आप भाग्यशाली हैं। 1.4 अरब की जनसंख्या वाले देश में ऐसी शिक्षा मिलती है तो आप विशेषाधिकार प्राप्त हैं। समानता को केवल शिक्षा के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों पर दबाव न डालें। विद्यार्थी के जीवन का उद्देश्य उसे स्वयं तय करने दें। यही विद्यार्थी हित के साथ ही देश हित में है।
भारत की हाल की यात्रा और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा आज भारत की संभावनाओं को प्रतिदिन व्यवहार में लाया जा रहा है।भारत एक उभरता हुआ राष्ट्र है, यह उभार निरंतर है। बीते दशक में भारत की आर्थिक प्रगति अभूतपूर्व रही है। विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में हम सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं। पिछला दशक हमारे लिए विकास का दशक रहा। विकसित भारत केवल सपना नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य है।इससे पूर्व उन्होंने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
विद्यालय के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने पुष्पगुच्छ देकर उपराष्ट्रपति का स्वागत किया और उनका जीवन परिचय पढ़ा। इसके साथ ही विद्यालय के बारे में जानकारी भी दी। कार्यक्रम के बाद उपराष्ट्रपति ने अपने माता-पिता की याद में पौधरोपण भी किया।इस मौके पर सेंट जोसेफ के प्रधानाचार्य ब्रदर एस जार्ज, बिड़ला के अनिल शर्मा, एलपीएस के भुवन त्रिपाठी, सेंट मैरी की सिस्टर मंजुषा, वासु साह आदि के साथ ही कुमाऊं के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।