नैनीताल। वीरभट्टी में अवैध मदरसा संचालन व बच्चों के साथ अभद्रता के मामले को 12 दिन बीत चुके हैं लेकिन पुलिस के हाथ अब तक न तो कोई अहम तथ्य लगा है और न ही जांच ही पूरी हो सकी है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया है। पुलिस का दावा है कि अब तक हुई जांच में मदरसा संचालक और मदरसे का न तो किसी आतंकी संगठन से संबंध उजागर हुआ है और न ही किसी एजेंसी से फंडिंग जैसी कोई बात सामने आई है।
आठ अक्तूबर को नैनीताल के समीप वीरभट्टी क्षेत्र में एक शिकायत के बाद अवैध रूप से चल रहे मदरसे का खुलासा हुआ था। छापे के दौरान जिला प्रशासन व पुलिस टीम को मदरसे में कई अनियमितताएं मिली थीं। यही नहीं मदरसे में अध्ययनरत बच्चों ने मदरसा संचालक व उसके बेटे पर कई गंभीर आरोप भी लगाए थे।
पड़ताल के दौरान संचालक के पास मदरसा चलाने संबंधी जरूरी दस्तावेज भी नहीं मिले थे। जिला प्रशासन ने मदरसे के तीन कमरों को सील करते हुए वहां मौजूद बच्चों को हल्द्वानी स्थित अन्य मदरसे में भेज दिया था। बच्चों के बयान दर्ज करने और परिजनों की काउंसलिंग के बाद बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था।
इस दौरान पुलिस ने मदरसा संचालक व उसके बेटे के अलावा वहां कार्यरत कर्मचारियों से पूछताछ की और उनके बैंक अकाउंट खंगाले। पुलिस का दावा है कि मदरसा संचालक और वहां कार्यरत लोगों का संबंध किसी आतंकी संगठन से नहीं है।
एसपी क्राइम व यातायात जगदीश चंद्रा का कहना है कि मदरसा संचालक हारून व उसके पुत्र इब्राहिम के खिलाफ आईपीसी की अलग अलग धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इब्राहिम के खिलाफ पॉक्सो के तहत भी मुकदमा दर्ज हुआ। उन्होंने बताया कि मुकदमे में लगी धाराओं में सात साल से कम की सजा होने के चलते आरोपियों को जमानत दे दी गई। बताया कि मामले में अभी जांच चल रही है। संवाद