हल्द्वानी। वीरांगना सोसायटी बाल भिक्षावृत्ति, बालश्रम रोकने के लिए वर्षों से प्रयास कर रही है। संस्था के प्रयासों से अब तक 250 बच्चों ने भिक्षावृत्ति छोड़ दी है। सात बच्चों ने नशा छोड़ दिया है। संस्था इन बच्चों को स्कूल भेजकर उनकी पढ़ाई लिखाई का खर्चा स्वयं उठा रही है ताकि समाज में वह सिर उठाकर जी सके। बच्चों के जीवन में बदलाव लाने का काम वीरांगना सोसायटी वर्ष 2013 से कर रही है। यह ऐसे बच्चे हैं जो समाज की मुख्यधारा से जुड़े नहीं थे। नशाखोरी, भीख मांगने, कूड़ा बीनने तक इनकी दिनचर्या रहती थी। सोसायटी अध्यक्ष और समाजसेवी गुंजन बिष्ट बताती हैं कि वह एक उद्देश्य लेकर चली हैं और ऐसे बच्चों के जीवन में रंग भरने की कोशिश भर कर रही हैं। संस्था ने 395 बच्चों को जब सड़कों पर भीख मांगते, श्रम करते देखा तो उन्हें अपने साथ लाई। इनमें कई तो नशे के आदी हो चुके थे जिनमें से अधिकतर से नशा छुड़वा दिया गया है। हर साल 52 बच्चों को स्कूल भेजने का काम संस्था कर रही है। इन बच्चों का आधार बनाने, आयुष्मान कार्ड बनाने की जद्दोजहद हर रोज चलती है। इन बच्चों का स्कूल में प्रवेश कराने के बाद इनके लिए कॉपी, किताब,ड्रेस के अलावा इनके भोजन की भी व्यवस्था करनी पड़ती है। कुछ बच्चे 10 वीं कक्षा में भी पढ़ रहे हैं। मजदूर परिवारों के कई बच्चों के पास पक्के आशियाने नहीं हैं। बरसात में अक्सर यह बच्चे रात में भी फोन करते हैं कि यह समस्या आ गई है। मेरे प्रयास भर से ही सबकुछ ठीक नहीं होगा। अगर इनके लिए ठोस योजना नहीं बनीं तो यह फिर उसी रास्ते पर जाने के लिए मजबूर होंगे। प्रयास यह है कि यह बच्चे बगैर किसी सपोर्ट के आगे बढ़ सकें।