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विद्या के लिए चरितार्थ हुआ वट सावित्री व्रत

Mon, 18 May 2015 01:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,रामनगर
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रविवार को विवाहिताओं ने पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री का व्रत रखा, वहीं दो माह से लापता पति गणेश के वियोग में डूबी विद्या देवी के लिए इस व्रत की कहानी चरितार्थ ही हो गई।
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इस वर्ष 12 मार्च को मगरमच्छ वाले क्षेत्र में लापता गणेश के कपड़े और अन्य सामान मिलने से सभी लोग कयास लगाने लगे थे कि शायद गणेश अब इस दुनिया में नहीं रहा। वहीं, गणेश की मां देवकी देवी और पत्नी के दिलों में किसी चमत्कार की उम्मीद थी कि शायद एक दिन वह लौट आएगा। यही उम्मीद और भगवान से प्रार्थना ही इस परिवार के साथ थी। रोज विद्या देवी पति के सकुशल घर लौटने की भगवान से प्रार्थना करती और बच्चों को संभालने के साथ ही निगाहें दरवाजे पर टिका देती, कि शायद आज गणेश लौट आए।

बुजुर्ग सास, दो मासूम बच्चों की परवरिश की चिंता में यह दो महीने विद्या देवी के लिए किसी सदी से कम नहीं गुजरे, क्योंकि घर का एकमात्र कमाऊ व्यक्ति गणेश ही था। इधर, रविवार को जैसे ही गणेश की मां विद्या देवी और पत्नी को गणेश के सकुशल मिल जाने की सूचना मिली तो विद्या देवी की जैसे प्रार्थना ईश्वर ने सुन ली हो। खास बात यह थी कि वट सावित्री व्रत के दिन ही उसे पति गणेश के सकुशल मिलने की सूचना मिली। खुशी में छलके विद्या देवी की आंखों के आंसू रह-रहकर शाम तक आंखों को भिगाते ही रहे। बच्चों को तो पिता के जाने और दो माह बाद इन हालातों में लौटने की बात हीं नहीं पता थी। लेकिन खुशी में बावली विद्या देवी बार-बार ईश्वर का शुक्रिया अदा करते हुए बच्चों की पेशानी को चूमती रही।
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इधर, ढेला की ग्राम प्रधान माया देवी ने बताया कि वह वट सावित्री का व्रत नही रखती हैं, लेकिन विद्या के पति की इस व्रत के दिन ही घर वापसी ने उनकी आस्था को और बढ़ा दिया है। विद्या का सुहाग वट सावित्री व्रत के दिन लौटा है, लिहाजा अब वह भी हर साल वट सावित्री का व्रत रखना शुरू करेंगी। 
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