अवैध खनन को लेकर दबंगों की गुंडई रुकने का नाम नहीं ले रही है। इमलीघाट उपखनिज निकासी गेट में रविवार को कुछ वाहन स्वामियों ने खल्ला (खाली वाहन की तौल) कराए बिना उपखिनज भर लिया। गेट पर खल्ला नहीं निकलने पर वन कर्मचारियों ने गाड़ी बाहर नहीं आने दी। इससे गुस्साए कुछ वाहन स्वामियों ने वन निगम के कर्मचारियों से अभद्रता कर उन्हें जान से मारने की धमकी दे डाली।
इधर, गुस्से में गेट इंचार्ज और अन्य कर्मचारियों ने निकासी गेट को बंद कर प्रदर्शन किया। इसके चलते इमलीघाट से शांतिपुरी तक करीब छह घंटे तक ट्रैक्टर-ट्रालियां जाम में फंसी रहीं और करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। बाद में मौके पर पहुंची पुलिस ने कर्मचारियों को समझाकर जाम खुलवाया। इस अराजकता के चलते वन विकास निगम को करीब चार लाख रुपए का नुकसान हुआ।
गौला के कई खनन निकासी गेटों से आए दिन अवैध खनन की खबरें आती रहती हैं। वहीं, इमलीघाट गेट पर भी अराजकता कम नहीं है। यहां खनन पट्टे के बावजूद अवैध खनन में जुटे लोग धड़ल्ले से उपखनिज निकालते रहते हैं। रविवार सुबह ओवरलोड उपखनिज की ट्रैक्टर-ट्रालियों पर खल्ला (खाली गाड़ी का वजन) न निकालने पर कुछ वाहन स्वामियों ने गेट कर्मियों और कंप्यूटर आपरेटरों से जमकर अभद्रता कर उन्हें जान से मारने की धमकी दे डाली। घटना के चलते गुस्साए गेट इंचार्ज राम अंचल दुबे ने गेट बंद कर उच्च अधिकारियों को सूचना दी।
विभागीय कर्मियों द्वारा निकासी गेट बंद किए जाने से शांतिपुरी से इमलीघाट तक दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। ट्रैक्टर-स्वामियों ने निकासी गेट खोले जाने की मांग कर वाहनों को गेट के सामने खड़ा कर दिया। करीब छह घंटे बातद पुलिस उपनिरीक्षक राजीव उप्रेती और डीएलएम महेश शर्मा ने मौके पर पहुंचे। गेट बंद होने से गुस्साए वाहन स्वामियों की डीएलएम से काफी कहासुनी भी हुई। वाहन स्वामियों का आरोप था कि अवैध खनन करने वाले कुछ लोगों की वजह से सभी वाहन चालकों को परेशान होना पड़ रहा है।
बाद में डीएलएम ने दोनों पक्षों से बात कर गेट खुलवाया। तब जाकर कहीं गौला में फंसे 190 ट्रैक्टर-ट्रालियां बाहर निकल सकीं। इधर, खबर लिखे जाने तक अभद्रता करने वालों के खिलाफ वन विकास निगम ने तहरीर नहीं दी थी।