कभी लेक ब्रिज चुंगी, टोल टैक्स का टेंडर तो कभी पार्किंग का ठेका...और अब डीएसए मैदान में लगने वाले मेले का मामला... नैनीताल नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सभासद जांच की मांग उठाते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती।
पालिका बोर्ड के विरोध के बावजूद पार्किंग का ठेका एक साल के बजाय 18 महीने का दे दिया गया। अनियमितताएं मिलने पर अब हाईकोर्ट ने पालिकाध्यक्ष के अधिकार सीज कर दिए तो अधिशासी अधिकारी को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
नगर में 20 सितंबर से 27 सितंबर तक हुए नंदा देवी मेले में तोरणद्वार, अस्थायी दुकान झूले के लिए पालिका ने 11 सितंबर को निविदा की। इसका ठेका गढ़वाल निवासी एस गुप्ता के नाम 87 लाख एक हजार रुपये में हुआ। उनके न आने पर और चिकित्सा प्रमाण पर पालिका ने दूसरे नंबर के ठेकेदार गढ़वाल के रमेश सजवाण को 69.11 लाख में ठेका दे दिया। तीसरे निविदादाता काशीपुर के कृष्ण पाल भारद्वाज उर्फ गांधी ने अधिवक्ता पीयूष गर्ग के माध्यम से 18 सितंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
उनका कहना है कि दरें ज्यादा होने के बावजूद उनका लिफाफा नहीं खोला गया लेकिन न्यायालय ने 20 सितंबर से मेला होने के कारण कार्रवाई नहीं की, अलबत्ता पालिका से जवाब मांगा।
इसके बाद 10 अक्तूबर को हुई सुनवाई के बाद न्यायालय ने 12 अक्तूबर की तिथि नियत की। इसी तिथि पर हाईकोर्ट ने डीएसए मैदान में लगने जा रहे बुक फेयर व एम्यूजमेंट पार्क (झूले आदि) को का स्वत: संज्ञान लिया। 17 अक्तूबर को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने पालिकाध्यक्ष के अधिकार सीज करते हुए ईओ के निलंबन के आदेश दिए।
न्यायालय का सम्मान, जांच टीम के समक्ष रखेंगे पक्ष : पालिकाध्यक्ष
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी ने पालिका में बुलाई पत्रकार वार्ता में अपना पक्ष रखा। कहा कि वह हाईकोर्ट का सम्मान करते हैं। कोर्ट ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है।
वह कमेटी के समक्ष प्रबलता से पालिका का पक्ष रखेंगे तथा सहयोग करेंगे। आदेश के अध्य्यन व अधिवक्ता से रायशुमारी के बाद न्यायिक स्तर पर कवायद करेंगे। उन्होंने कहा कि नंदा देवी महोत्सव के ठेके के मामले में न्यायालय गए ठेकेदार की निविदा टेक्निकल बिड में फेल हो गई थी। इसी कारण वित्तीय निविदा का लिफाफा नहीं खोला गया। इसमें न्यायालय ने सीए की ओर से जारी प्रमाणपत्र के यूडीआईएन को लेकर आपत्ति जताई है लेकिन कमेटी के समक्ष इसे खोला गया। इसे जांच अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा।
पुस्तक मेले के सवाल पर कहा कि गर्मियों के दौरान उक्त प्रार्थनापत्र पर पालिका ने एनओसी मांगी थी लेकिन जिला प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी थी। नंदा देवी मेले के बाद एसडीएम की एनओसी के बाद इसकी कवायद हुई पर पालिका ने अब तक इस संबंध में कोई अनुबंध नहीं किया है।
पालिका के इन मामलों पर भी उठे सवाल
- सभासद कैलाश रौतेला ने वाटर कूलेंट प्यूरीफायर लगाने पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की थी। आरोप था कि जलस्रोत के पुनर्जीवित करने का बजट प्यूरीफायर पर खपा दिया।
- डीएसए पार्किंग के ठेके के विस्तारीकरण पर भी कई सभासदों ने बोर्ड के रद्द करने के बाद पूर्व ठेकेदार को ठेका देने की मुखालफत की थी।
- पुराने कूड़ा खड्ड के पास बोर्ड ने पार्क व झूले लगाने के लिए कहा था जिसमें आठ सभासदों के हस्ताक्षर भी हैं लेकिन निजी स्वार्थ के लिए किसी को दे दिया गया।
- वेतन को लेकर पालिका में दिक्कत है। वेतन पेंशन मद में राज्य वित्त से दिसंबर तक का भुगतान होने के बावजूद सितंबर तक वेतन मिल पाया है।
एबीसी सेंटर मामले में अवमानना नोटिस हुए थे
नगर पालिका के खिलाफ मल्लीताल अंडा मार्केट में श्वान स्टरलाइजेशन ऑपरेशन के लिए बने एबीसी सेंटर में सफाई व्यवस्था न होने और पालिका के कोर्ट में दिए बयान के बाद हाईकोर्ट गठित टीम को कम श्वान मिलने पर ईओ को अवमानना नोटिस हो चुके हैं।
नियमितताओं की जांच एसडीएम कोश्याकुटौली को सौंपी
भाजपा नगर अध्यक्ष आनंद बिष्ट व अरविंद पडियार ने अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच की मांग उठाई। डीएम ने एसडीएम कोश्याकुटौली विपिन जोशी को इसकी जांच सौंपी है। इसमें शासन की ओर से नजूल भूमि भूमि को लेकर बनाए गए नियमों का पालिका की ओर से किए गए उल्लंघन, बोर्ड बैठक में पास किए बगैर निर्माण कार्य कराने, बिना बोर्ड में पास कराए सफाई उपकरण, स्ट्रीट लाइट व अन्य सामग्री खरीद, शासन की ओर से जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए अवमुक्त धनराशि से वाटर प्यूरीफायर लगाने, डीएसए मैदान में रॉक क्लाइंबिंग वॉल, लेक ब्रिज पार्किंग की अनुबंध शर्तों में बदलाव की जांच, रिंक हॉल को लीज पर देने आदि की जांच शामिल है।
173 वर्ष की पालिका में पहली बार पालिकाध्यक्ष के अधिकार सीज
नैनीताल नगर पालिका की स्थापना तीन अक्तूबर 1850 को हुई थी। देश की सबसे पुरानी नगर पालिकाओं में शुमार नगरपालिका के जनहित में बने नियम तथा पालिकाध्यक्ष के पदों पर रहे लोगों के कार्य को लोग हमेशा याद करते हैं। वर्ष 2008 से 2013 के दौरान लेकब्रिज ठेके पर उठे सवालिया निशान के बाद पालिका सीबीआई जांच के घेरे में आई लेकिन जांच के बाद तत्कालीन पालिकाध्यक्ष और अन्य को क्लीन चिट मिल चुकी है।