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UK News: हाईकोर्ट ने कहा- बच्चों के भविष्य और पढ़ाई पर ध्यान दें शिक्षक, इस मामले की सुनवाई के लिए तिथि तय की

Fri, 26 Sep 2025 09:56 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति से जुड़े मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों को आंदोलन करने के बजाय बच्चों के भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।

 
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति के मामले में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। पूर्व में कोर्ट ने शिक्षकों के आंदोलन के बाद सरकार ने इस मामले को शीघ्र सुनवाई की गुहार कोर्ट से लगाई थी। कोर्ट ने इस प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखना चाहिए ना कि आंदोलन करना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश जी नरेन्दर एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। प्रदेश के एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की पदोन्नति के मामले पिछले कई वर्षों से अटके पड़े हुए हैं। इसको लेकर शिक्षक लंबे समय से सरकार से मांग करते आ रहे हैं। अपनी मांगो को लेकर प्रदेश के 5000 शिक्षकों ने आंदोलन की चेतावनी दी थी। शिक्षकों के आंदोलन की घोषणा के बाद पूर्व सुनवाई में महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर और मुख्य स्थायी अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत ने मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष इस मामले को मेंशन करते हुए लंबित मामलों पर जल्द सुनवाई की मांग की थी।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2012 से शिक्षकों का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। जिसके चलते शिक्षकों की पदोन्नति और स्थानांतरण नहीं हो पा रहे हैं। प्रदेश के हजारों नाराज शिक्षक आंदोलन पर चले गये हैं। आंदोलन के चलते स्कूल बंदी के कगार पर हैं। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षकों की तरफ से कहा गया कि प्रधानाचार्य पद की सीधी भर्ती को निरस्त किया जाए। इस पद को पदोन्नति से भरा जाए ना कि सीधी भर्ती से। क्योंकि वे वर्षों से कार्य करते आ रहे है। सरकार ने उनको इसका लाभ नही दिया गया। जिस पर अभी तक कोई विचार नही किया गया। जबकि कई शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो चुके है। उनको ग्रेच्युटी व पेंशन का लाभ मिल चुका है। उनकी भी पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश भुवन चन्द्र कांडपाल के केस के आधार पर की जाए। क्योंकि सरकार ने उन्हें पदोन्नति दी है।

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