नैनीताल हाईकोर्ट ने छह मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए बिना सुविधा के छह माह का सोनोग्राफी प्रशिक्षण का कोर्स कराए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पक्षकारों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मामले के अनुसार इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव की अध्यक्षता में 6 और 7 मई 2026 को हुई बैठक में राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों को ‘फंडामेंटल इन एबडोमिनो पेल्विक अल्ट्रासोनोग्राफी लेवल-1 फॉर एमबीबीएस डॉक्टर्स’ नाम से छह माह का सोनोग्राफी प्रशिक्षण शुरू करने की मंजूरी दी गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नए प्रशिक्षण के लिए अलग आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराए बिना इसे शुरू करना एमसीआई के दिशा-निर्देशों और नियमों के विपरीत है। याचिका में कहा कि प्रशिक्षण के लिए अलग फैकेल्टी होनी चाहिए, क्योंकि मौजूदा पाठ्यक्रम में छात्रों की संख्या के अनुपात में ही फैकल्टी उपलब्ध है और उसका उपयोग नए पाठ्यक्रम के लिए नहीं किया जा सकता। याचिका में कहा कि बिना सुविधा के यह छह माह का कोर्स करना उचित नहीं है। कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।