उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केनरा बैंक की उस विशेष अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें बैंक ने अपनी शाखा के भवन को खाली करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग की थी। मामला सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। बैंक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि जिस भवन में उसकी शाखा किरायेदार के रूप में संचालित है, उसके किसी हिस्से को अगले आठ महीने तक ध्वस्त न किया जाए, ताकि बैंक को दूसरी जगह स्थानांतरित होने का समय मिल सके। एकलपीठ ने बैंक को सक्षम प्राधिकारी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के समक्ष प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी थी और निर्णय होने तक भवन के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। बैंक ने इसके बाद प्रतिनिधित्व किया, लेकिन बीआरओ ने 18 अगस्त 2026 को उसे खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि भवन जिस भूमि पर स्थित है, वह नेशनल हाईवे एक्ट के तहत अधिसूचित राइट ऑफ वे में आती है।
इस भूमि के संबंध में 28 दिसंबर 2022 को धारा 3जी के तहत अवार्ड भी पारित हो चुका था और भवन मालिक अमर सिंह को 33.68 लाख मुआवजा दिया गया था। अदालत ने कहा कि 18 अगस्त के आदेश को वर्तमान विशेष अपील में चुनौती नहीं दी गई है, इसलिए एकलपीठ के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। परिणामस्वरूप विशेष अपील को खारिज कर दी गई। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इससे केनरा बैंक को 18 अगस्त 2026 के आदेश को अलग से चुनौती देने से रोका नहीं जाएगा।