उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अधिवक्ता के खिलाफ सोशल मीडिया में धमकी भरे कमेंट के मामले में एसएसपी को निर्देश दिए है कि वे सोशल मीडिया में धमकी भरे कमेंट को तत्काल डिलीट करवाएं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी अधिवक्ता को कोई केस लेने से नहीं रोका जा सकता है।बता दें कि अधिवक्ता के खिलाफ सोशल मीडिया में धमकी भरे कमेंट किए गए थे क्योंकि उन्होंने एक विशेष मामले में पैरवी की थी। कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं को अपने कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका जा सकता है।
कोर्ट ने अधिवक्ता को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश एसएसपी को दिए हैं। इससे पहले भी कई मामलों में कोर्ट ने सोशल मीडिया पर रोक लगाने और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह आदेश एक जिप्सी मामले में सुनवाई के दौरान कहा है।उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल के हल्द्वानी में हुए नन्ही परी के दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में आरोपी की वकालत करने वाली अधिवक्ता की सुरक्षा के मुहैय्या कराने के आदेश दिए है। कोर्ट ने एसएसपी नैनीताल को आदेश दिए है कि अधिवक्ता व उनके परिवार को तत्काल सुरक्षा दें। वहीं कोर्ट ने आईजी साइबर क्राइम को आदेश दिया है कि वो सोशल मीडिया से भड़काऊ पोस्ट को डिलिट कराएं अगर कोई ऐसा करने से मना करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वकील सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रहे हैं अगर किसी को प्रदर्शन करना है तो जांच अधिकारी के खिलाफ करें। कोर्ट ने वकील के खिलाफ मुहिम चलाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई करने को कहा है।
नैनीताल के काठगोदाम में हुए 10 साल पहले नन्ही परी दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में आरोपी सुप्रीम कोर्ट से बरी हो गया। आरोपी के बरी होने के बाद कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं तो वहीं सोशल मीडिया में आरोपी की वकालत करने वाली अधिवक्ता के खिलाफ मुहिम चलाई है और मारने तक की धमकी पोस्ट में मिल रही हैं।