कहा गया कि पिछले साल बाढ़ में कई पुल बह गए थे। आबादी क्षेत्रों में बाढ़ आने का मुख्य कारण सरकार की लापरवाही है। सरकार ने नदियों के मुहानों पर जमा गाद, बोल्डर व मलबा नहीं हटवाया। अवमानना याचिका में कहा गया कि सरकार ने उच्च न्यायालय के 14 फरवरी 2023 के आदेश का पालन नहीं किया गया। जिसकी वजह से प्रदेश में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हुई और सरकार को एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार संबंधित विभागों को साथ लेकर नदियों से गाद, मलबा व बोल्डर हटाकर उन्हें चैनलाइजेशन करे ताकि बरसात में नदियों का पानी
बिना रूकावट के बह सके। लेकिन अभी तक सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया, जबकि कुछ माह बाद बरसात का सीजन शुरू हो जाएगा। अवमानना याचिका में नैनीताल व हरिद्वार के वर्तमान जिलाधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। पोखरिया ने अपने केश की पैरवी स्वयं की।