उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में आरोपी मोत्सीन को पहले मिली जमानत को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने कहा कि जमानत के बाद आरोपी के आचरण से साफ है कि उसने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में आरोपी मोत्सीन को पूर्व में मिली जमानत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। कोर्ट ने उसे तुरंत संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने अवलोकन में स्पष्ट किया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी के आचरण और गतिविधियों से यह साफ तौर पर जाहिर होता है कि उसने न्यायपालिका द्वारा दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है।
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कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी दोहरा हत्या जैसे गंभीर अपराध के मामलों का सामना कर रहा है और जमानत पर बाहर रहते हुए वह लगातार गवाहों और शिकायतकर्ताओं को केस वापस लेने के लिए डरा-धमका रहा था। कोर्ट में संबंधित थानाध्यक्ष की विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार जमानत अवधि के दौरान आरोपी के खिलाफ सहारनपुर के नागल और फतेहपुर पुलिस स्टेशन में कई नए आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिनमें पॉक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा एसएसपी सहारनपुर द्वारा आरोपी को हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया है और उसे सहारनपुर जिले की सीमाओं से निष्कासित भी किया जा चुका है।
मामले की गंभीरता और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने जमानत रद्द करने की याचिका को स्वीकार कर लिया। अदालत ने एक अप्रैल 2025 को दिए गए जमानत आदेश को वापस लेते हुए आरोपी को अविलंब आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह आदेश दिया गया है कि यदि आरोपी स्वयं आत्मसमर्पण नहीं करता है तो संबंधित थानाध्यक्ष उसे तुरंत न्यायिक हिरासत में लें।