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Nainital News: तकनीक का उपयोग न्याय को सरल बनाने के लिए हो

Sun, 01 Oct 2023 02:12 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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माई सिटी रिपोर्टर/संवाद
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भवाली (नैनीताल)। ''तकनीक का उपयोग न्याय को सरल बनाने के लिए होना चाहिए, इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी। उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्र के मुवक्किल परेशान रहते हैं, तकनीकी प्रभावी होने से उन्हें भी मदद मिलेगी। '' ये बातें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया ने उत्तराखंड ज्यूडिशियल एंड लीगल एकेडमी ( उजाला) में आयोजित सेमिनार में कहीं। इसमें मौजूद न्यायाधीशों ने कहा कि ऐसे सेमिनार से न्यायिक प्रक्रिया की गति तेज होगी और बेहतर मार्ग तय होगा। इसके लाभदायक और दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।


शनिवार को उजाला में भारतीय न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावशाली बनाने के लिए उत्तर क्षेत्रीय न्यायिक सेमिनार शुरू हुआ। इसमें सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीशों के अलावा उत्तराखंड के साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, असम के उच्च न्यायालयों से भी न्यायाधीश पहुंचे। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि वह न्यायाधीशों के बीच खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की न्यायपालिका सर्वोपरि और इतनी मजबूत है कि भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने हिंदी भाषा को न्यायिक व्यवस्था में अधिक प्रयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान हमारी न्यायपालिका ने जो कार्य किया वह अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। न्यायिक व्यवस्था में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) विषय पर राज्यपाल ने कहा कि हर भारतीय का डीएनए स्वत: ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को सपोर्ट करता है। इसके उपयोग से मानव जीवन को सकारात्मक दिशा में मोड़ा जा सकता है। सेमीनार में वक्ताओं ने कहा कि ऐसे सेमीनारों से न्यायिक प्रक्रिया की गति तेज होगी और बेहतर मार्ग तय होगा। सेमीनार में उत्तराखंड के साथ ही जम्मू कश्मीर, हिमांचल, यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, असम आदि राज्यों से न्यायाधीशगण मौजूद रहे।
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राज्यपाल ने गिनाईं उपलब्धियां

- न्यायपालिका ने पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकारों के उल्लंघन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के समाधान के लिए सक्रिय कदम उठाए।

- न्यायिक सक्रियता से जांच, संतुलन व्यवस्था मजबूत हुई। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ई-ट्रू कॉपी जारी करने के लिए कदम उठाया है।
- उच्च न्यायालय, जिला न्यायालयों के निर्णय, आदेश की प्रमाणित कॉपी के लिए वादी को अदालत परिसर में जाने की जरूरत नहीं।

- सभी अदालतें डिजिटल और कागज रहित होने की प्रक्रिया में हैं। न्यायपालिका के लिए एक एकीकृत प्रौद्योगिकी मंच तैयार हो रहा है।


क्रिप्टो करेंसी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर चर्चा

सेमिनार में न्यायिक प्रक्रिया को अत्याधुनिक तकनीक की मदद से और भी पारदर्शी और प्रभावी बनाने जैसे विषय पर भी न्यायिक विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। क्रिप्टो करेंसी, ब्लॉक चेन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट्ट, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट्ट, न्यायमूर्ति संजय कारोल, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा आदि विशिष्ट अतिथियों ने विचार रखे।
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सेमीनार में ये रहे मौजूद

उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज तिवारी, न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा, न्यायमूर्ति आलोक वर्मा, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित और न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा समेत महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, सांसद और हाईकोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष महेंद्र पाल सिंह, डीएम वंदना, एसएसपी पीएन मीणा, केएमवीएन के महाप्रबंधक एपी वाजपेयी आदि मौजूद रहे।
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