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अपनी शर्तें भारत पर थोपना चाहता है अमेरिका : राजराजेश्वराश्रम

Thu, 30 Apr 2015 02:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
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शारदा पीठ के जगद्गुुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम ने एफडीआई और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा द्वारा सलाह देने की आलोचना की है। जगद्गुरु ने कहा कि राजदूत का ऐसे मसलों पर सलाह देना देश की लोकतांत्रिक और चुनी हुई सरकार पर सवाल खड़ा करता है। अमेरिका को इसे समझना चाहिए।
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यहां तल्ली स्थित सुयाल स्टेट में आयोजित श्रीमद्भागवत गीता के समापन पर बुधवार को पहुंचे जगद्गुरु ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अमेरिका अपनी शर्तें भारत पर थोपना चाहता है। ‘सबका साथ,  सबका विकास’ स्वदेसी मानसिकता के साथ ही हो सकता है। राजदूत का यह कहना कि भारत अगर एफडीआई की शर्तों पर विचार नहीं करता है तो देश में अर्थ नियोजन की शर्त पर अमेरिका विचार करेगा, यह काफी चिंताजनक है। इस मामले में राष्ट्रीय बहस के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों को एक सीमा तक ही काम करने की छूट मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि विश्व में यदि कही धर्म जिंदा है तो भारत में है। आक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी धर्म की परिभाषा अलग-अलग दी गई है। गांधीजी ने जिस रामराज की कल्पना की थी, वैसा देश में देखने को नहीं मिला। धर्म निरपेक्षता की व्यवस्था ने गांधी के मूल चिंतन को समाप्त कर दिया।
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पिछले चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने कहा था कि संविधान से निरपेक्षता शब्द को समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने इस शब्द को हटाने की मांग करते हुए कहा कि संविधान धर्म नियंत्रित होना चाहिए। बतौर उदाहरण- अमेरिका के डालर पर, ‘इन गॉड बी ट्रस्ट’ और इंडोनेशिया की करेंसी पर ‘भगवान राम’ लिखा होता है।

उन्होंने कथावाचक नमन कृष्ण के साथ ही जजमानों को भी आशीर्वाद दिया। इसके बाद वह शादी समारोह में मुख्यमंत्री की बेटी को आशीर्वाद देने पहुंचे। मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से मिलने के बाद जगद्गुरु ने उन्हें भी आशीर्वाद दिया और हरिद्वार चले गए।
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