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Nainital News: यूओयू में नए सत्र से शुरू होंगे भगवद्गीता और मानवाधिकार प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम

Wed, 01 Jul 2026 12:52 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में नए शिक्षा सत्र से भगवद्गीता स्टडीज और मानवाधिकार प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू होगा। शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए एक जुलाई से प्रवेश शुरू होंगे। कुलपति ने विश्वविद्यालय के नए शैक्षणिक सत्र, अकादमिक कैलेंडर, नए पाठ्यक्रमों और छात्रहित में शुरू की गई सुविधाओं की जानकारी दी।
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कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि विवि में प्रवेश की अंतिम तिथि 10 अगस्त है। वर्तमान में 15 स्नातक, 35 स्नातकोत्तर, 16 डिप्लोमा और 29 प्रमाणपत्र कार्यक्रमों में प्रवेश दिया जा रहा है। एमबीए, एमसीए, एमटीटीएम, बीएड स्पेशल एजुकेशन, एमएड स्पेशल एजुकेशन, बीए योग (ऑनर्स) और एमए योग कार्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन भी एक जुलाई से विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। कुलपति ने बताया कि विवि के 144 शिक्षार्थी सहायता केंद्र विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहयोग प्रदान करेंगे। प्रेस वार्ता में प्रो. वीडी पंत, प्रो. गिरिजा पांडे, प्रो. सोमेश कुमार, प्रो. एमएम जोशी, प्रो. जीतेंद्र पांडे, कुलसचिव खेमराज भट्ट आदि मौजूद रहे।
यूओयू ने शुरू किया असिस्टेंट होम स्टे मैनेजर पाठ्यक्रम
हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए असिस्टेंट होम स्टे मैनेजर पाठ्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा। पाठ्यक्रम राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद से अनुमोदित है। इसे राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा के अनुरूप विकसित किया गया है। प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का स्नातक द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय व्यवसाय प्रमाणपत्र या दो वर्षीय डिप्लोमा धारक 12वीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने बताया कि संबंधित क्षेत्र में न्यूनतम तीन वर्ष का कार्यानुभव रखने वाले 12वीं उत्तीर्ण युवा भी पाठ्यक्रम के लिए पात्र होंगे।
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प्रवेशार्थियों को नहीं पड़ेगा आर्थिक बोझ
कुलपति प्रो. लोहनी ने कहा कि अब सभी सेमेस्टर आधारित कार्यक्रमों में सेमेस्टरवार शुल्क जमा करने की सुविधा होगी। इससे शिक्षार्थियों पर एक-मुश्त पड़ने वाला आर्थिक भार दो सेमेस्टरों में विभाजित हो जाएगा। किसी भी कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर विद्यार्थी स्वतः विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र (एलुमिनी) के रूप में पंजीकृत हो जाएंगे।
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