नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से कचरे को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने की पहल की गई है। इसके अलावा विवि की ओर से ग्राफीन उत्पादन के क्षेत्र में भविष्य के शोध प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
डीएसबी परिसर स्थित रसायन विज्ञान विभाग के अंतर्गत संचालित प्रो. राजेंद्र सिंह नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर में प्राध्यापक के पद पर कार्यरत प्रो. नंद गोपाल साहू ने कहा कि बीते दिनों कुविवि और कुरुक्षेत्र विवि ने एमओयू हस्ताक्षर किया है। इसके तहत कचरे को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने की पहल को और मजबूत किया जाएगा।
इस एमओयू का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच विद्वानों, शोधकर्ताओं और छात्रों में ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक और शैक्षणिक माहौल को सुदृढ़ करना और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना है। समझौते के तहत शोध सुविधाओं के आपसी उपयोग पर भी जोर दिया गया है जिससे शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक उपकरणों और संसाधनों तक पहुंच मिल सकेगी। संवाद