कुमाऊं विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया पहले ही टेस्ट में फेल हो गई है। पहले तो आवेदन प्रक्रिया में विद्यार्थियों की मेरिट लिस्ट तक तैयार नहीं की, अब अत्यधिक विलंब होने पर मेरिट लिस्ट तैयार करने की जिम्मेदारी भी महाविद्यालयों पर डाल दी है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की कॉपी लेकर पहुंच रहे छात्र-छात्राओं के हाइस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकों के साथ-साथ आरक्षण, एनसीसी, एनएसएस और अन्य कोटे के वरीयता अंक जोड़ कर मेरिट लिस्ट तैयार करने में महाविद्यालयों के लिए समस्या पैदा रही है।
कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने दूसरे विश्वविद्यालयों की तर्ज पर यहां भी नये सत्र 2017-18 में ऑनलाइन प्रवेश किए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद स्नातक प्रथम सेमेस्टर ऑनलाइन प्रवेश के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया 10 जून को शुरू हो गई। आवेदन करने की अंतिम तिथि पहले 10 जुलाई थी, इसे बढ़ाकर 17 जुलाई फिर 24 जुलाई किया गया। इस बीच स्थानीय विद्यार्थियों को प्रवेश में वरीयता अंक देने का मामला फंसने के कारण विश्वविद्यालय ने अगले आदेशों तक प्रवेश प्रक्रिया रोक दी गई थी। तीन अगस्त को हाइकोर्ट का फैसला आने के बाद महाविद्यालयों को प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी किए गए।
विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू करते वक्त कहा था कि स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश की मेरिट लिस्ट विश्वविद्यालय की ओर से भेजी जाएगी और महाविद्यालयों का काम केवल मेरिट लिस्ट के आधार पर विद्यार्थियों के शैक्षिक अभिलेख चेक कर उनका प्रवेश शुल्क जमा कराना होगा। विश्वविद्यालय की इस बात के भरोसे कुमाऊं भर के सभी महाविद्यालय बैठे रहे कि मेरिट लिस्ट मिलने पर फटाफट प्रवेश शुरू कर देंगे लेकिन ऐन वक्त पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने महाविद्यालयों को निर्देश जारी कर दिए कि सभी महाविद्यालय विद्यार्थियों के दस्तावेज चेक कर मेरिट लिस्ट स्वयं तैयार कर प्रवेश देंगे। इस तरह विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया केवल रजिस्ट्रेशन कराने तक ही सीमित रही। एमबीपीजी कालेज में बीए, बीएससी और बीकॉम के प्रवेश के लिए बनाए गए काउंटरों पर देखने पर मालूम चला कि विद्यार्थी ऑनलाइन प्रवेश के रजिस्ट्रेशन की कॉपी लेकर आ रहे थे। इसके आधार पर काउंटर पर बैठे कर्मचारी छात्र के हाइस्कूल, इंटर के अंकों के अलावा नाम और विषय से लेकर सारी सूचनाएं कंप्यूटर पर दर्ज करने में जुटे थे ताकि उसके आधार पर मेरिट तैयार की जा सके।
विश्वविद्यालय ने पहले कहा था कि जो मेरिट भेजी जाएगी उसके आधार पर स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश किए जाएंगे लेकिन अब यह काम भी महाविद्यालय को दे दिया है। इस वजह से काम काफी बढ़ गया है। यही काम अगर जुलाई में दे दिया जाता तो काफी सुविधाजनक रहता।
- डॉ. जगदीश प्रसाद, प्राचार्य एमबीपीजी कालेज