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Nainital News: बेकाबू पर्यटन नैनीताल के भविष्य के लिए खतरनाक

Mon, 05 Jun 2023 01:47 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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नैनीताल। हिमालयी राज्य में शामिल उत्तराखंड के पर्यटक नगरों में भी पर्यावरण संरक्षण की दरकार है। नैनीताल में बेकाबू पर्यटन नगर के पर्यावरण और भविष्य के लिए खतरनाक है। विकास की दौड़ में पहाड़ में बढ़ रहे कंक्रीट के जंगल भी पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं।
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विश्व पर्यावरण दिवस पर अमर उजाला ने पर्यावरणविद्, इतिहासकार, पर्वतारोही, नैनीझील संरक्षण की मुहिम में जुटे कुछ लोगों से बातचीत की। उनका कहना है कि शासन-प्रशासन को नैनीताल में उसकी क्षमता निर्धारित कर पर्यटक वाहन और पर्यटकों की संख्या निर्धारित करनी होगी। बेकाबू पर्यटन नगर के पर्यावरण व भविष्य के लिए खतरनाक है। नैनीताल माॅडल के अनुरूप अन्य पर्यटक स्थलों में भी पर्यटन को निर्धारित करना होगा।

ब्रिटिश हुकूमत के दौर से नैनीताल में निर्माण, बसासत और पर्यटन के लिए सख्त नियम रहे। आजादी के बाद 1960 के दशक तक नियमों का अनुपालन हुआ। इसके बाद विकास की दौड़ में नियम पीछे छूट गए। वर्ष 2007 में एटीआई भू-वैज्ञानिक, जीएसआई समेत अन्य विषय विशेषज्ञों की कार्यशाला के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी कि नैनीताल की भार क्षमता अब खत्म हो गई है। उसी वर्ष वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार की ओर से माउंटटाबू, माथेरन के साथ ही नैनीताल को ईको सेंसटिव जोन घोषित किया गया। परिक्षेत्र के विकास की दौड़ में वन संपदा का क्षेत्रफल कम होने, नदियों का जल स्तर कम होने, तालाबों के कम अथवा विलुप्त होने और प्राकृतिक जल स्रोत की कमी को गंभीरता से लेकर नियोजित करना होगा।
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-प्रो.अजय रावत पर्यावरणविद् इतिहासकार

प्रदेश सरकार की चारधाम यात्रा में पंजीकरण व निर्धारित पर्यटक भेजने की पहल सराहनीय है। सरकार को नैनीताल समेत प्रदेश के अन्य पर्यटक स्थलों का भी विषय विशेषज्ञों से सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इसके बाद स्पष्ट व सख्त नियम बनाने होंगे। 2013 में एवरेस्ट की चढ़ाई और साल 2014 में कंचनजंघा चोटी फतह करने के दौरान चोटियों में गंदगी देखकर मन बेहद दुखी हुआ। सरकार को हिमालयी परिक्षेत्र समेत नैनीताल सरीखी पर्यटन नगरी के बेहतर भविष्य के लिए नियम तय करने होंगे।
टुसि अनित साह पर्वतारोही

निजी स्तर पर लंबे समय से नैनीझील की सफाई और पौधरोपण में जुटे पर्यावरण प्रेमियों से अपील की है कि वह अपने स्तर से जीवनदायिनी नैनीझील समेत जल संरक्षण और पौधरोपण से जुड़ें। नैनीताल की आर्थिकी पर्यटन पर टिकी है। ऐसे में उनके हित देखते हुए नगर में होटलों की संख्या, पार्किंग की क्षमता अन्य समीपवर्ती पर्यटकों स्थलों में वहां की भार सुविधा के अनरूप पर्यटकों को लाना होगा जिससे यहां का पर्यटन बेहतर हो और बाहर जाकर लोग बेहतर छवि लेकर जाएं।
-यशपाल रावत पर्यावरण प्रेमी

नैनीताल में बीते कई दशकों से पर्यटक वाहन दबाव से जाम की समस्या बढ़ती जा रही है। प्रशासन को पार्किंग स्थलों में वाहन चालकों व अन्य के लिए कैंटीन, बिजली, पानी, शौचालय आदि तैयार करने के साथ ही वाहन सुरक्षा भी देनी होगी। होटलों, टैक्सी समेत अन्य की दरें भी सार्वजनिक होनी चाहिए जिससे पर्यटक को दिक्कतें न झेलनी पड़ें। पालिका को भी सैलानियों के संख्या के सापेक्ष व्यवस्थाएं करनी होंगी। अब समय आ गया है कि नगर की क्षमता के अनुरूप पर्यटन को नियोजित किया जाए।
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-डीएन भट्ट, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष
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