हल्द्वानी। सरकार के नए नियमों के कारण गौला में काम करने वाले आठ हजार मजदूर और दो हजार वाहन स्वामियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नए नियमों के कारण हल्द्वानी क्षेत्र के चार स्टोन क्रशरों ने उपखनिज खरीदना बंद कर दिया है। उधर, एक स्टोन क्रशर ने शुक्रवार से उपखनिज नहीं खरीदने का पत्र वन विकास निगम के डीएलएम को सौंपा है। इस कारण दो हजार वाहन खड़े हो गए हैं। उधर, वन विकास निगम को प्रतिदिन 45 लाख रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
उत्तराखंड स्टोन क्रशर, लालकुआं स्टोन क्रशर, हिमालया स्टोन क्रशर और हिमालया ग्रिड ने गौला से उपखनिज खरीद बंद कर दी है। उधर, सुभाष स्टोन क्रशर ने वन विकास निगम के अधिकारियों को पत्र लिखकर शनिवार से उपखनिज नहीं खरीदने का पत्र सौंपा है। शनिवार से पांच स्टोन क्रशर उपखनिज नहीं खरीदेंगे। वन विकास निगम के डीएलएम वाईके श्रीवास्तव ने बताया कि गौला नदी में शुक्रवार को दो हजार वाहन खनन निकासी को नहीं उतरे। इस कारण वन विकास निगम को 45 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि पांच स्टोन क्रशरों ने उपखनिज खरीदने से मना कर दिया है।
ये है नया नियम
वाहन स्वामी अपनी मर्जी से स्टोन क्रशर में उपखनिज नहीं बेच सकेंगे। शासन ने स्टोन क्रशरों को उनकी क्रसिंग क्षमता के अनुसार उपखनिज खरीदने का लक्ष्य दिया है। इससे ज्यादा कोई भी क्रशर स्वामी उपखनिज नहीं खरीद सकेगा।
नियम नहीं बदला तो करोड़ों का राजस्व घाटा होगा
सरकार ने जल्द नियमों में बदलाव नहीं किया तो बरेली रोड के अधिकतर स्टोन क्रशर उपखनिज खरीदना बंद कर देंगे। इसके चलते गौला से तय 36 लाख घनमीटर उपखनिज भी नहीं निकल पाएगा। इससे सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि होगी। वहीं गौला नदी से जुड़े आठ हजार वाहन स्वामी, 20 हजार श्रमिक और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े 40 हजार लोग बेरोजगार हो जाएंगे।