‘नशे के खिलाफ जंग, पारंपरिक खेल खेलेंगे हम’ के उद्देश्य से बुधवार से एफटीआई में पारंपरिक खेलों का शानदार आगाज हुआ। वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने बच्चों को शपथ दिलाकर खेलों का शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा कि 2018 में होने वाले नेशनल गेम्स में उत्तराखंड के दो पारंपरिक खेलों को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो बच्चे पारंपरिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें आगे जाने का मौका मिलेगा। साथ ही, ऐसे खिलाड़ियों के प्रशिक्षकों को भी सम्मानित किया जाएगा।
डा. हृदयेश ने कहा कि इस तरह के आयोजन से बच्चों का रुझान खेल की तरफ होता है। खेल खेलने से बच्चों की व्यस्तता बढ़ती है और वे नशे आदि की तरफ नहीं जाते हैं। आनंद रावत ने इस तरह का आयोजन कर एक बेहतर पहल की है।
आज क्रिकेट सब पर भारी है, सारे खेल क्रिकेट के नीचे दब कर रह गए हैं। स्कूलों में भी खेल के मैदान नहीं हैं, जिस कारण बच्चों को खेलने का मौका नहीं मिल पा रहा है। पारंपरिक खेल बच्चे छोटी सी जगह या घर पर भी खेल सकते हैं।
डा. हृदयेश ने कहा कि हल्द्वानी और देहरादून में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाने का उद्देश्य ही यह था कि यहां की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का मौका मिले। यहां राष्ट्रीय खेल होंगे और यहां के खिलाड़ी पदक नहीं जीतेंगे तो यहां की जनता निराश होगी। उन्होंने बच्चों से कहा कि आप खेलें और राष्ट्रीय स्तर पर हमें खुशी मनाने का मौका दें।
एफटीआई सुबह के आठ बजे हैं। पारंपरिक खेलों में हिस्सा लेने के लिए ग्राउंड में सुबह से ही बच्चों की लाइन लगने लगी हैं। खेल विभाग का स्टाफ बच्चों का रजिस्ट्रेशन कर रहा है। जैसे-जैसे दिन बढ़ता जा रहा है, लाइन लंबी होती जा रही है। सुबह साढ़े नौ बजे तक करीब पांच सौ से ज्यादा बच्चों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है।
हर कोई पहली बार कुमाऊं में होने वाले इस पारंपरिक आयोजन का हिस्सा बनना चाहता है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और सीएम हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत ने भी सुबह नौ बजे से ही मोर्चा संभाल लिया है। माइक पकड़कर वो बच्चों का उत्साह बढ़ा रहे हैं।
बीच-बीच में कभी रजिस्ट्रेशन काउंटर में चले जाते हैं तो कभी रसोई की व्यवस्था भी देख लेते हैं। सुबह के दस बजे फुटसाल खेलने के लिए डीएवी और सेंट थेरेसा की टीम मैदान में पहुंचती है। पहली बार फुटसाल खेलने को लेकर दोनों टीमों के खिलाड़ियों में डर भी है और उत्साह भी। उनके इस डर को भांप कर आनंद कहते हैं ‘बच्चों! देखोगे तभी सीखोगे, सीखोगे तभी जीतोगे।’
छोटे-छोटे बच्चे आनंद रावत से कह रहे हैं, ‘सर जी गाना बजा दो फिर तो हम स्कूल चले जाएंगे।’ आनंद कहते हैं पहले झिंगूरे की खीर खाओ, लेकिन बच्चे नहीं मानते। इस पर आनंद कहते हैं ‘ढोल वाले भइया ढोल बजा दो।’ इसके बाद बच्चों ने रणसिंह, तुतरी, मसकबीन और ढोल-दमाऊं की थाप पर डांस किया।
आनंद रावत बच्चों को प्राइज सेरेमनी के लिए बुला रहे थे, लेकिन बच्चे तो डांस करने में मस्त थे। इस पर आनंद बोलते हैं बच्चों फटाफट इनाम ले लो, फिर खाना खाएंगे। यदि आपने देर की तो मेरी ‘झिंगूरे की खीर ठंडी हो जाएगी।’ बच्चों ने झिंगूरे की खीर, गहत की दाल और पालक के कापे का आनंद उठाया और बोले सर जी मजा आ गया।
खेल खत्म होने के बाद आनंद रावत ने सभी बच्चों से कहा कि यदि किसी की गाड़ी न आई हो तो मुझे बताए, मैं उसे छोडूंगा। कोई भी बच्चा अकेले घर नहीं जाएगा।
पहले दिन पारंपरिक खेलों का समापन आनंद रावत ने पूरे कुमाऊंनी अंदाज में किया। उन्होंने पारंपरिक खेलों में हिस्सा लेने आए स्कूली बच्चों के साथ ‘खोली दे माता खोल भवानी, धार में किवाड़ा, के लै रो छै भेट पोखव, के खोलूं किवाड़ा’ लोकगीत की धुन पर खूब मस्ती की। इस दौरान छोलिया नर्तक दल मशकबीन में ‘बेड़ू पाको बारोंमासा, नरैंण काफल पाको चैत मेरी छै ला’ की धुन से लोगों का भरपूर मनोरंजन करता रहा।
आपदा प्रबंधन अध्यक्ष प्रयाग दत्त भट्ट, मंडी समिति अध्यक्ष सुमित हृदयेश, कांग्रेसी नेता खजान पांडे, दिनेश कुंजवाल, ललित जोशी, लीला कांडपाल, सुष्मिता पंत, इंस्प्रेशन के दीपक बल्यूटिया, दीक्षांत के समित टिक्कू, व्यापारी नेता जसविंदर भसीन, जेडीएम की प्रिंसिपल राधा ऐठानी, तनुजा जोशी, सहायक निदेशक अख्तर अली, डीएसओ रशिका सिद्दीकी, उप क्रीड़ाधिकारी बबीता बिष्ट, जानकी कनवाल, पूनम मेहता, नीता, सुनील, रितेश, राहुल सोनकर, केदार पलड़िया, मेंबर इंतजार हुसैन।