ट्यूबवेल खराब होने या लो वोल्टेज के कारण न चलने पर अब अधिकारियों को भटकना नहीं पड़ेगा। कंट्रोल रूम में बैठे कर्मियों को कुमाऊं के लगभग 266 ट्यूबवेलों के बारे में पल-पल की जानकारी रहेगी। भीमताल में कंट्रोल रूम बनाने का काम अगस्त में शुरू होगा। स्कैडा सिस्टम के माध्यम से इसकी जानकारी मिलेगी।
गढ़वाल में देहरादून स्थित कंट्रोल रूम का प्रयोग सफल होने के बाद अब कुमाऊं में कंट्रोल रूम बनाने की तैयारी चल रही है। ट्यूबवेल में लगे आटो मेशन पैनल में आधुनिक तकनीक होती है। ट्यूबवेलों के पैनलों में सिर्फ एक सिम लगाया जाएगा। सिम लगने के बाद कंट्रोल में रखे कंप्यूटर से सभी ट्यूबवेलों को जोड़ दिया जाएगा।
भीमताल में एक कमरे में तीन कंप्यूटर लगाने के साथ ही सिस्टम शुरू हो जाएगा। स्कैडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजीशन) लगने के बाद कुुमाऊं के सभी ट्यूबवेलों के बारे में जानकारी रहेगी। ट्यूबवेल कितनी देर चला, ट्यूबवेल क्यों बंद है, कौन सा चल रहा है, बंद होने का क्या कारण है सभी की जानकारी एक कमरे से ही अधिकारियों को मिल जाएगी।
===================
जिले ट्यूबवेल
पिथौरागढ़ 00
अल्मोड़ा 09
बागेश्वर 01
नैनीताल 159
चंपावत 10
ऊधमसिंह नगर 87
================
योग 266
================
कोट
देहरादून में कंट्रोल रूम का सिस्टम सफल रहा है। अब कुमाऊं में भीमताल में कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। अगस्त से इसका काम शुरू हो जाएगा। इस पर ज्यादा खर्च भी नहीं होगा। जल संस्थान या आउटसोर्स से कर्मियों को रखकर कंट्रोल रूम संचालित कराया जाएगा। कुमाऊं में मिनी और बड़े ट्यूबवेल मिलाकर 266 हैं।
- एसके गुप्ता,मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थान, देहरादून