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ट्रायल सफल: दक्षिण भारत की मिलिया से मिलेगी ‘लक्ष्मी’

Mon, 08 Aug 2016 12:48 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव
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मिलिया डूबिया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दक्षिण भारत की मिलिया डूबिया प्रजाति को उत्तराखंड की जमीन भा गई है। 2011 में वन विभाग ने पॉपुलर के विकल्प के तौर पर इस प्रजाति को लगाने का ट्रायल तराई के जंगलों में किया था, यह सफल रहा है।
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वन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार मिलिया डूबिया प्रजाति को एग्रो फारेस्टी के तौर पर किसान इस्तेमाल कर सकते हैं, इसका रेट पॉपुलर की तुलना में ज्यादा भी मिलता है।

वन विभाग प्रोडेक्शन फारेस्ट्री और एग्रो-फारेस्ट्री के नये विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश में लगा है। इसी के तहत काला शीशम से लेकर पॉपुलर के विकल्प के तौर पर दक्षिण भारत के कर्नाटक आदि जगहों पर मिलने वाली मिलिया डूबिया प्रजाति को इस्तेमाल की योजना बनाई।
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करीब छह साल पहले तराई केंद्रीय वन प्रभाग के टांडा रेंज, पीपल पड़ाव क्षेत्र और लालकुआं नर्सरी में इसका ट्रायल शुरू किया गया था। वन क्षेत्राधिकारी अनुसंधान मदन बिष्ट कहते हैं कि करीब चार हेक्टेयर में इस प्रजाति का ट्रायल किया गया था, यह प्रयोग सफल रहा है।

उत्तराखंड की जमीन मिलिया डूबिया को भा गई है। अब अगले साल से किसानों को इसकी पौध उपलब्ध कराने का काम शुरू किया जाएगा। हाल में फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने भी दौरा किया था और इसके परिणाम से संतुष्ट नजर आये हैं।

इस प्रजाति को खासकर पॉपुलर के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, इससे प्लाइवुड, पैकिंग आदि का सामान बन सकता है।

पूर्व मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान व जायका प्रोजेक्ट के सलाहकार एसके सिंह कहते हैं कि खेत में इसको लगाने के साथ खेती की जा सकती है, यह  प्रजाति तेजी से बढ़ती है। गुणवत्ता अच्छी होने के साथ इसका दाम भी पॉपुलर की तुलना में ज्यादा अच्छा मिलता है। 
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