मंगलवार 10 जनवरी को नैनीताल हाईकोर्ट ने रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश देते समय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी के खिलाफ सख्त टिप्पणियां कीं। विस्तृत आदेश के पेज छह पर लिखा है, ‘सामान्य हालात में तो हमने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी के तबादले का आदेश कर दिया होता। लेकिन हम उन्हें एक अंतिम मौका दे रहे हैं कि वे अपनी क्षमता साबित करें।’
विस्तृत आदेश के पेज चार पर लिखा है, ‘नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने 14 दिसंबर के पत्र के माध्यम से यह कहते हुए राज्य पुलिस की व्यवस्था करने से इनकार कर दिया कि रेलवे को भूमि के अधिग्रहण संबंधी मूल कागजात प्रस्तुत करने चाहिए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ऐसा पत्र लिखने का कोई अधिकार नहीं था।
उन्होंने अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है। उनकी जिम्मेदारी केवल कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने की थी और इसमें वे बुरी तरह फेल हुए हैं। कानून का शासन बरकरार रखने जैसे संवेदनशील/नाजुक मसलों को संभालने की उनमें क्षमता नहीं है।’
इसी क्रम में हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (नैनीताल) ने पक्के तौर पर बाहरी सत्ताधिकारियों (आउटसाइड अथॉरिटीज) के दबाव में काम किया है... उन्होंने हर संभव प्रयास किया है कि इस अदालत के आदेशों का पालन न हो सके। उन्होंने न्याय के मार्ग में बाधा खड़ी की है।