ब्यूरा ग्राम पंचायत से कुमाऊं का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन सटा है। ट्रेन तो इस गांव के आंगन में पहुंच गयी। मगर गांव के भीतर सड़कें तो दूर रास्ते तक नहीं बन पाए हैं। इस गांव के लोगों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या संपर्क मार्गों की है। इसके अलावा पानी के लिए भी लोग परेशान रहते हैं। पानी लाइनें तो कुछ कालोनियों में बिछी हैं मगर पानी नहीं आता है। रास्ते संकरे होने के कारण टैंकर भी आसानी से नहीं पहुंच पाता है।
हालांकि अब एक पानी का टैंक जरूर बना है मगर यह चालू कब होगा कोई पता नहीं है। इसके अलावा गांव में सफाई की व्यवस्था भी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आंगन में ट्रेन पहुंचने का भी कोई फायदा नहीं मिला। वह कई बार नेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को समस्याओं के बारे में अवगत करा चुके हैं। मगर आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि गांव में रास्ते और सड़क बन जाए तो उनकी सबसे बड़ी मुसीबत दूर हो जाएगी।
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मल्ला ब्यूरा निवासी लीला पांडे बताती हैं कि बरसात के सीजन में डर लगा रहता है। पूरे गांव और ग्राम सभा से जुड़े जंगल का पानी उनके घर में घुस जाता है। उसकी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है।
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सामाजिक कार्यकर्ता अमर राम कहते हैं कि क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत है। कई मुहल्लों में टैंकर तक नहीं जा पाते। जिससे लोगों को दूर-दूर से पानी ढोना पड़ता है। पेयजल टैंक बना है लेकिन उसमें अभी तक पानी की सप्लाई नहीं हुई है।
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छात्रा नेहा जोशी का कहना है कि संकरे रास्ते हैं और उनमें दिनभर घोड़े-खच्चरों के चलने से दिक्कतें बनी रहती हैं। स्कूल आना-जाना मुश्किल हो जाता है।
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विनीत सोनी बताते हैं कि चार फिट का मार्ग है। उसमें भी दिनभर घोड़े-खच्चर चलते रहते हैं। ऐसे में कई दोपहिया वाहन सवार रपट कर चोटिल हो चुके हैं। रास्तों में भी जगह-जगह पाइपों का जाल बिछा है।
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हेमा मिश्रा का कहना है कि नालियां बनी हैं पर सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। न सीवर लाइन बिछी है और न ही घरों में पानी आता है। रास्ते संकरे होने से बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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ग्राम प्रधान नवीन पांडे का कहना है कि उन्होंने ग्राम पंचायत में सोलर लाइट लगवाई हैं। 50 हजार लीटर क्षमता का पेयजल टैंक बनकर तैयार है। जल्द शुरू होने की उम्मीद है। सबसे बड़ा काम टंगड़ क्षेत्र में वित्तमंत्री के सहयोग से चौड़ी सड़क का कराया है।