नए साल के पहले दिन की शुरुआत सैलानियों और स्थानीय लोगों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना से की। नया साल मनाने पहुंचे सैलानियों के वाहनों का दबाव जिलेभर की सड़कें नहीं झेल पाईं और जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रही। श्रद्धालुओं को भवाली से कैंची धाम तक छह किमी दूरी तय करने में चार घंटे से अधिक का समय लग गया। जाम खुलवाने और यातायात को सुचारु कराने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
रानीबाग-भीमताल रोड पर लगा छह किलोमीटर लंबा जाम, यात्री हलकान
नए साल के पहले दिन मैदान से पहाड़ को आने जाने वाले यात्रियों व सैलानियों को रानीबाग-भीमताल रोड पर घंटों तक जाम से जूझना पड़ा। दोपहर बाद सड़क पर यातायात का दबाव इतना बढ़ा कि काठगोदाम से सूड़ी (चंदादेवी) तक लगभग छह किलोमीटर लंबा जाम लग गया। देर शाम तक इस रोड पर वाहन रैंगते रहे। जाम के चलते पहाड़ के आने जाने वाले लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मंगलवार को बड़ी संख्या में सैलानी थर्टी फस्ट मनाने के लिए भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल, भवाली, मुक्तेश्वर, कैंची धाम आदि क्षेत्रों में पहुंचे थे। इनमें से कई लोग बुधवार को वापस लौटे जबकि कई नए सैलानी हल्द्वानी से पहाड़ की ओर को रवाना हुए। भीमताल रानीबाग रोड पर दोपहर एक बजे तक यातायात का दबाव सामान्य था लिहाजा वाहनों की आवाजाही सुचारू बनी रही लेकिन दो बजे के बाद भीमताल से हल्द्वानी की ओर आने वाले और हल्द्वानी से भीमताल की ओर जाने वाले वाहनों की संख्या में एकाएक इजाफा हो गया।
जिसके चलते काठगोदाम से लेकर चंदादेवी के ऊपर स्थित सूडी गांव तक जाम लग गया और सड़क के दोनों ओर पांच से छह किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। अलग अलग स्थानों पर मौजूद पुलिस के जवानों को जाम खुलवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। शाम छह बजे तक काठगोदाम से ऊपर रानीबाग व चंदादेवी तक वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी।
40 मिनट का सफर तय करने में लग गए दो से ढाई घंटे
भीमताल से हल्द्वानी तक का 23 किलोमीटर सफर तय करने में औसतन 40 से 50 मिनट लगते हैं। लेकिन बुधवार को काठगोदाम से ऊपर की ओर जाम लगा होने के कारण यात्रियों व सैलानियों को भीमताल से हल्द्वानी तक का सफर तय करने में दो से ढाई घंटे तक लग गए।