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मौखिक व अनुभवात्मक रूप से प्रसारित होता है पारंपरिक ज्ञान : प्रो. नीता

Thu, 26 Dec 2024 11:36 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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नैनीताल। उत्तराखंड पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन (उपसा) व भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में (इपसा) की ओर से ‘भारतीय परंपरागत चिंतन एवं ज्ञान : राजनीतिक पारिस्थितिकी से संभावनाएं’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का बुधवार को समापन हो गया । मुख्य अतिथि डीएसबी परिसर की निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा रहीं।
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यूजीसी मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर कुमाऊं विवि में हुए सेमिनार में मुख्य अतिथि ने कहा कि पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान स्वदेशी और स्थानीय समुदायों के पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने वाले ज्ञान, प्रथाओं और विश्वास का प्रतीक है। यह पीढ़ियों से मौखिक व अनुभवात्मक रूप से प्रसारित होता है। प्रो. ललित तिवारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का विशेष महत्व है, जिसमें भारतीय दृष्टि से शोध की जरूरत है l
कार्यक्रम को प्रो. एमएम सेमवाल व प्रो. दिव्या जोशी ने भी संबोधित किया। आयोजक सचिव डॉ. रीतेश साह ने बताया कि दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में सात तकनीकी सत्र हुए। इनमें कुल 93 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। वहां डॉ. निशु भाट्टी, प्रो. सुमन कुमार, डॉ. दिनेश गहलोत, डॉ. पुष्पेश पंत, डॉ. राखी पंचोला, डॉ. राजेश पालीवाल, डॉ. प्रकाश लखेड़ा, डॉ. मनस्वी, डॉ. मोहित रौतेला, डॉ. अरविंद सिंह रावत आदि थे।
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भमोरा। फाईल फोटो अंजली- फोटो : mathura

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