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यूपीआई शुल्क ने बढ़ाई व्यापारियों की धड़कन: कारोबारियों ने बताया आर्थिक शोषण, कहा- करेंगे विरोध

Thu, 17 Sep 2026 11:28 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी

सार

एनपीसीआई द्वारा यूपीआई पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट शुल्क लगाने के फैसले का व्यापारियों ने विरोध किया है। व्यापारियों का कहना है कि वे यह शुल्क अपनी जेब से क्यों दें, और जबरन शुल्क थोपे जाने पर पुरजोर विरोध किया जाएगा। 
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यूपीआई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के यूपीआई पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट शुल्क लगाने के फैसले का व्यापारियों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि वह इस शुल्क को अपनी जेब से क्यों दे। यदि उन पर जबरन शुल्क थोपा गया तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। कारोबारियों ने इसे व्यापारियों का आर्थिक रूप से शोषण करार दिया है। बुधवार को दिन भर बाजार में कारोबारियों के बीच यह शुल्क चर्चा का विषय बना रहा।

सरकार ने 15 अक्तूबर से ग्राहक से व्यापारी को 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर एमडीआर शुल्क लगाने की घोषणा की है। इसे ग्राहक से नहीं बल्कि कारोबारी से वसूला जाएगा। दो हजार से अधिक की राशि का भुगतान यूपीआई से होने पर संबंधित व्यापारी को बैंक, ऐप और पेमेंट कंपनी को 0.4 फीसदी धनराशि देनी होगी जो अधिकतम 300 रुपये तक है।

बड़े प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा असर, छोटे कारोबारियों को राहत

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सरकार के इस फैसले का असर बड़े कारोबारियों और प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा जबकि छोटे कारोबारियों को इससे विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। सबसे अधिक प्रभावित हास्पिटल, रेस्टोरेंट्स, बड़े आढ़ती, होटल कारोबारी, टैक्सी कारोबारी, सीमेंट-सरिया विक्रेता, ज्वेलर्स, बड़े मॉल स्वामियों, टू और फोर व्हीलर शोरूम स्वामियों, थोक विक्रेताओं पर पड़ेगा। यहां होने वाले अधिकतर भुगतान दो हजार से अधिक के होते हैं। नए नियम से 50,000 के पेमेंट पर कारोबारी को 200 रुपये एमडीआर देना होगा। अधिकतर बड़े शोरूमों में औसत बिल दो हजार से ऊपर का ही रहता है।

 

बैंकों को मिलेगा आर्थिक लाभ
जानकारों के मुताबिक अब तक यूपीआई से होने वाले भुगतान बैंकों के लिए घाटे का सौदा रहते थे। इससे बैंकों को कोई आर्थिक लाभ नहीं होता था लेकिन अब 0.4 फीसदी एमडीआर शुल्क वसूलने के बाद उसमें से एक बड़ा हिस्सा बैंकों, फोन पे, जी-पे जैसे ऐप को भी मिलेगा। इससे बैंकों का सालाना रेवेन्यू बढ़ेगा।

 

कहीं ऐसा न हो कि यह बोझ भी ग्राहकों पर मढ़ दिया जाए

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इस बात की भी संभावनाएं अधिक हैं कि कारोबारी कहीं यह शुल्क भी ग्राहकों से ही न वसूल लें, क्योंकि पूर्व में कई बार ऐसी शिकायतें आई हैं कि कई बड़े कारोबारी मसलन पेट्रोल पंप में फ्यूल सरचार्ज, ज्लेवर्स के यहां कार्ड सरचार्ज, सिनेमा हाल और ट्रेवल एजेंसियों में कन्वीनियंस शुल्क व सर्विस चार्ज के रूप में ग्राहक से ही वसूला जाता है। ऐसे में इस बात की भी संभावना है कि अब कारोबारी एमडीआर शुल्क भी किसी न किसी रूप में ग्राहक से ही वसूल कर लें।

बैंकों और एटीएम में बढ़ेगी भीड़
यदि कारोबारी दो हजार से अधिक का भुगतान यूपीआई से लेने से मना कर दें तो ऐसे में ग्राहक के पास नकद भुगतान के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है। ऐसे में ग्राहक कैश लेने के लिए बैंक या एटीएम पर पहुंचेंगे। इससे बैंकों में कामकाज का लोड बढ़ने के साथ-साथ बैंक और एटीएम में फिर से लाइन लगती नजर आएगी।

सरकार पहले कैशलेस को बढ़ावा देती रही और अब दो हजार से अधिक के भुगतान पर व्यापारियों पर शुल्क थोप दिया है। यह व्यापारियों के साथ सरासर धोखा है। उपभोक्ता का तो कुछ नहीं जाएगा व्यापारियों की जेब कटेगी। व्यापारी इसका विरोध करते हैं। सारे कानून व्यापारियों पर थोपे जा रहे हैं। सरकार इसे वापस ले। - विपिन गुप्ता जिलाध्यक्ष प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल नैनीताल।

दो हजार से अधिक यूपीआई से भुगतान पर हम क्यों टैक्स दें। यदि जबरन इसे थोपा गया तो व्यापारी इस टैक्स को भी किसी न किसी तरह से ग्राहक से ही वसूल करेगा। इससे बचने के लिए व्यापारी ग्राहक से नकद भुगतान लेगा।
-राहुल किराना व्यवसायी हल्द्वानी

सरकार के इस फैसले से व्यापारी सहमत नहीं हैं। इससे व्यापारियों का शोषण बढ़ेगा। आज ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ रहा है। ऐसे में इस फैसले का व्यापारी विरोध करेंगे। यदि कोई व्यक्ति किसी को एक लाख रुपये यूपीआई से देता हो न तो लेने वाले को शुल्क देना होगा और न ही देने वाले को, जबकि एक दुकानदार यदि 2500 रुपये यूपीआई से लेता है तो उसके पैसे लगेंगे। यह गलत है।
- हर्षवर्धन पांडे, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल

सरकार के इस फैसले का असर कहीं न कहीं ग्राहकों पर ही पड़ेगा जिस तरह जीएसटी का भुगतान हम ग्राहक से ही लेते हैं, ठीक वैसे ही इस शुल्क को भी हम ग्राहक से ही वसूल करेंगे। व्यापारी बेवजह अपनी जेब से शुल्क का भुगतान क्यों करें?
- घनश्याम रस्तोगी, अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन हल्द्वानी।

दो हजार से अधिक की राशि यूपीआई से भुगतान करने पर लगने वाले एमडीआर शुल्क से बैंकों के कामकाज में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अब तक जिस तरह क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने पर एमडीआर शुल्क लिया जाता है यह भी ठीक उसी तरह से है। हो सकता है कुछ समय के लिए दिक्कतें आएं लेकिन जब व्यापारी समझ जाएंगे कि इससे उनका ही हित है तो वे भी इसे स्वीकार करेंगे।

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- अमित बाजपेयी लीड बैंक अधिकारी नैनीताल

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