फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खनन शुरू करने के लिए महंगे सौदे से भी परहेज नहीं सरकार को

Mon, 03 Apr 2017 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
विज्ञापन
बदल दी जमरानी की धारा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
हल्द्वानी। खूबसूरत जंगल, हरे-भरे खेत, घिसट कर चलता एक घराट और पूरी तरह से बदरंग होती नदी। यह नजारा है कि जमरानी बांध क्षेत्र में गौला नदी का। बेहिसाब खनन ने हल्द्वानी को करीब 40 एमएलडी पानी देने वाली गौला का चेहरा पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। यही नदी है, जिसे हाइकोर्ट ने अब ज्यूरिस्टक पर्सन का दर्जा भी दे दिया है। गौला अब यहां यह सवाल भी पूछ रही है कि आखिर खनन की कीमत क्या है? फिलहाल हकीकत यह है कि इको सर्विस के रूप में ग्रीन बोनस का प्रदेश सरकार 20 हजार करोड़ मांग रही है और 1500 करोड़ (जो खनन से राजस्व के रूप में मिलता है) पर जान न्यौछावर कर रही है। 
विज्ञापन


हाल ही में हाइकोर्ट ने चार माह तक खनन प्रतिबंधित करते हुए सरकार से सतत विकास बनाम खनन का सवाल भी पूछा है। हाइकोर्ट के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय समिति को यह भी बताना है कि क्या प्रदेश में दीर्घकालिक, सतत विकास या संवहनीय विकास की तर्ज पर खनन किया जा सकता है। उच्च स्तरीय समिति का जवाब तो बाद में आएगा, लेकिन गौला का वर्तमान स्वरूप यह बता रहा है कि यह संभव नही है।

हाइकोर्ट के आदेश के बाद से सरकार की प्रतिक्रिया से जाहिर है कि यह सवाल सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। खनन प्रतिबंध के खिलाफ जिन 13 बिंदुओं को लेकर प्रदेश सरकार सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दाखिल करने जा रही है, उसमें भी यह शामिल नहीं है। खनन से मिल रहे राजस्व पर फोकस करने में यह भुला ही दिया गया कि नदियों में खनन की भारी कीमत चुकाई जा रही है। 
विज्ञापन


यह तब है जब कांग्रेस और भाजपा दोनों ही एक सुर में ग्रीन बोनस की मांग केंद्र से करती रही हैं। तर्क यही है कि अपने नदी, जंगल, पहाड़ के रूप में उत्तराखंड आधे भारत को आक्सीजन, पानी और वन संसाधन उपलब्ध करा रहा है। 13वें वित्त आयोग से इस एवज में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने करीब 20 हजार करोड़ रुपये के ग्रीन बोनस की मांग भी की थी। खनन से इस बार सरकार करीब 1500 करोड़ रुपये के राजस्व आय का अनुमान लगा रही है। जाहिर है कि खनन के नाम पर प्रदेश में 20 हजार करोड़ की कीमत पर 1500 करोड़ रुपये का सौदा सरकार करने की कोशिश में है।

सरकार भी मानती है कि खनन में दीर्घकालिक या सतत विकास का ध्यान रखा जाना चाहिए। पिछले पांच साल में नदियों का जो बेहिसाब दोहन किया गया, यह उसी का नतीजा है कि खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा। लेकिन, इस पूर्ण प्रतिबंध से दोहरा नुकसान है। आरबीएम से नदियों का तल ऊंचा होगा और प्रदेश को राजस्व का नुकसान होगा। - प्रकाश पंत, वित्त मंत्री  
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें