फैसले के बाद शहीद मोहन शर्मा के पैतृक गांव चौखुटिया तहसील के तिमिलखाल में उनकी मूर्ति पर श्रद्वा?
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। बाटला हाउस कांड में शहीद हुए दिल्ली के पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के हत्यारे को फांसी की सजा होने पर उनके पैतृक गांव तिमिलखाल सहित पूरे मासी और चौखुटिया में लोगों ने खुशी जताई है। मोहन शर्मा के पैतृक गांव में उनके परिजनों और ग्रामीणों ने गांव के शहीद स्मारक पर बनी उनकी प्रतिमा पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश के लिए उनके बलिदान को अविस्मरणीय बताया।
इस मौके पर मोहन शर्मा के दोनों चचेरे भाई खीमानंद मासीवाल व जगदीश मासीवाल, मोहन सिंह, हीरासिंह, पवन मासीवाल, नंदन सिंह आदि थे। चचेरे भाई खीमानंद मासीवाल ने मोहन शर्मा के हत्यारे को सजा मिलने पर इसे परिवार के साथ ही देश के लिए भी बड़ी खुशी का पल बताया है। उन्होंने कहा कि इससे शहीद मोहन की शहादत पर सवाल खड़े करने वाले भी बेनकाब हो गए हैं। इधर, तिमिलखाल से लगे आदिग्राम फुलोरिया के पूर्व प्रधान चंद्रप्रकाश फुलोरिया का कहना है कि शहीद मोहन के हत्यारे को फांसी की सजा सुनाए जाने पर उन्हें बहुत सुकून मिला है। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा, महेश वर्मा, गोविंद सिंह आदि लोगों ने भी इस पर खुशी जताई है।
मोहन शर्मा के सम्मान के मामले में सोई है राज्य सरकार
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। मोहन शर्मा के चचेरे भाई जगदीश मासीवाल ने इस मौके पर अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि मोहन शर्मा के शहादत दिवस 19 सितंबर को राज्य स्तरीय शहीद दिवस घोषित किए जाने संबंधी मांग लंबे समय से की जा रही है। इससे संबंधित फाइल पिछले चार साल से प्रशासन स्तर पर अटकी पड़ी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। राज्य सरकार को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहीद मोहन चंद्र शर्मा को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान मिलता रहा है लेकिन प्रदेश स्तर पर सरकार सोई है।
प्रतिक्रियाएं
देरी से आया फैसला लेकिन बहुत अच्छा निर्णय है। भविष्य में ऐसी घटना होने पर समय पर फैसला आना चाहिए। जल्द न्याय मिलना चाहिए।- अखिल रतन, अल्मोड़ा।
अदालत का फैसला सर्वप्रिय है। शहीद मोहन चंद्र शर्मा की आत्मा को शांति मिलेगी। इस तरह के जघन्य अपराधियों को जीने का कोई अधिकार नहीं है। शहीद और उनके परिजनों को न्याय मिला है। - विनोद फुलारा।