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बहू और ससुर को निवाला बनाने वाले बाघ ने भी तोड़ा दम 

Sat, 18 Mar 2017 01:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रामनगर। 
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tiger attack
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रामनगर (नैनीताल)। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के बैलपड़ाव रेंज की पश्चिमी चांदनी बीट के अंतर्गत चांदनी प्लाट नंबर 3 आरक्षित वन क्षेत्र में बृहस्पतिवार को ससुर और बहू को बाघ ने निवाला बना लिया था। उसे काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू कर नैनीताल जू उपचार के लिए ले जाया जा रहा था कि उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। उसका कालाढूंगी रेंज के घटगढ़ वन चौकी में पोस्टमार्टम किया गया। उसका बिसरा जांच के लिए भेजने के साथ ही उसको वहीं जलाकर नष्ट कर दिया गया। 
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तराई पश्चिमी वन प्रभाग की बैलपड़ाव रेंज में बृहस्पतिवार को दाबका नदी में खनन कार्य करने वाले श्रमिक मेें से कुछ लोग लकड़ी बीनने गए थे। इस दौरान उत्तरप्रदेश के कादराबाद थाना संभल भगवती पति रामदास को बाघ अचानक झाड़ी से निकलकर जंगल की ओर खींच ले गया था। उसे ढूंढने आए भगवती के चचिया ससुर लखपत पर भी हमला बोल बाघ उसे जंगल में घसीट ले गया था।

वन विभाग ने काफी मशक्कत के बीच बाघ को ट्रैंक्यूलाइज करने के बाद पिंजरे में कैद किया। कुछ देर चूनाखान टूरिज्म प्राथमिक उपचार के बाद बाघ को नैनीताल जू ले जाया जा रहा था, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बाघ का शव बृहस्पतिवार रात में तराई पश्चिमी के कालाढूंगी रेंज के घटगढ़ में रख दिया गया था, जहां उसका कालाढूंगी के डॉक्टर लीलेंद्र जोशी और बैलपड़ाव के डा. डीके आर्या ने पोस्टमार्टम किया। 
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डीएफओ कहकशां नसीम ने बताया कि पोस्टमार्टम के अनुसार रेस्क्यू करते समय जेसीबी पर कई बार हमला करने से उसके अधिकांश दांत टूट गए थे। अत्यधिक खून बहने और आपसी संघर्ष की वजह से दोनों पैरों मेें पुरानी चोट की वजह से इनफेक्शन फैल गया था। इस कारण वह शिकार करने मेेें असमर्थ था।

उसकी उम्र 8 वर्ष बताई जा रही है और वह 15-20 दिन से भूखा प्रतीत हो रहा था। बाघ का बिसरा व डीएनए के लिए खाल मय बाल का नमूना जांच के लिये भेजने के बाद उसे वन परिसर में ही जलाकर नष्ट कर दिया है। इस मौके पर एसडीओ बीएस शाही, रेंज अधिकारी शेखर चंद्र तिवाड़ी, वन्यजीव विशेषज्ञ एजी अंसारी, मोहन बधानी आदि उपस्थित थे।

कालाढूंगी(नैनीताल)। तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर के बैलपड़ाव रेंज में पकड़े गए बाघ की मौत के बाद वन अधिकारियों के रेस्क्यू ऑपरेशन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाघ को पकड़ने में विभाग द्वारा की गई लापरवाही सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अधिकारियों के माथे पर बल पड़ गए हैं। उधर, विभागीय अधिकारी इस मामले में कुछ कहने से बच रहे हैं।

विभाग ने ट्रैंक्यूलाइज किए गए बाघ को आसानी से पकड़ने के बजाय जेसीबी के पंजे से पहले दबाया उसके बाद उसे जाल में फंसाया गया। इस कारण बाघ घायल हो गया। आशंका है कि यही बाघ की मौत का कारण बना। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी बाघ की मौत का कारण अत्यधिक खून बहना बताया गया है। परंतु विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघ की मौत भूख के कारण हुई है। 

वन विभाग की लापरवाही का आलम ये था कि बाघ को विभाग द्वारा पकड़े जाने के बाद रास्ते में कहीं भी उपचार नहीं दिया गया। यदि विभाग समय रहते बाघ को उपचार देता तो शायद बाघ की जान बच सकती थी। विभाग ने शाम 5 बजे बाघ को पकड़ लिया था लेकिन उसे नैनीताल जू ले जाने के लिए विभाग ने 5 घंटे का समय लगा दिया। 
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