गौलापार नकायल के ग्रामीणों के लिए सूखी नदी परेशानी का सबब बनी है। बरसात में सूखी नदी में बाढ़ आने से बच्चे हफ्तों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं। वहीं इलाके में राशन, पानी, बिजली का संकट पैदा हो जाता है। ग्रामीणों का संपर्क क्षेत्र से कट जाता है। तीन साल पूर्व सूखी नदी में पुल और विजय पुर में काजवे का शिलान्यास गौलापुल के साथ ही किया गया था। लेकिन शिलान्यास का पत्थर लगने के बावजूद अभी तक पुल निर्माण की दिशा में कोई काम नहीं किया गया है। जिससे ग्रामीणों में खासा रोष है। क्षेत्रवासियों ने शीघ्र पुल का निर्माण नहीं किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
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सूखी नदी में बाढ़ आने पर बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है। शासन से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक पुल निर्माण के लिए कोई काम नहीं हुआ है।
- भास्करानंद भट्ट, नकायल, गौलापार।
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सूखी नदी तो हमारे लिए अभिशाप बन गई है। डेरी में दूध ले जाना मुश्किल हो जाता है। बच्चे एक-एक हफ्ते तक स्कूल नहीं जा पाते हैं। बरसात में राशन नहीं मिलने से भोजन के भी लाले पड़ जाते हैं।
- पनुली देवी, नकायल, गौलापार।
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सूखी नदी में जब बाढ़ आती है तो दहशत बनी रहती है। घरों को भी खतरा पैदा हो जाता है। पानी, बिजली सप्लाई सब ठप हो जाती है। 40 परिवारों के इस गांव के लोगों को हमेशा भय बना रहता है। शासन प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है।
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- बालम सिंह देउपा, नकायल, गौलापार।
सूखी नदी में पुल नहीं होने के कारण उन्हें अपनी ट्राई साइकिल से गौलापार या हल्द्वानी जाने के लिए एक के सहारे की जरूरत पड़ती है। बगैर सहारे के वह कहीं आ जा नहीं पाते हैं। अगर पुल बन गया होता तो वह स्वयं की आना जाना कर लेते।
- लक्ष्मीदत्त भट्ट, विकलांग. नकायल गौलापार।
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सूखी नदी में बाढ़ आने से कई जानवर अब तक बह चुके हैं। एक बार गांव के पधान हीराबल्लभ भट्ट सूखी में बह गए थे। ग्रामीणों के अथक प्रयास से उन्हें बचाया जा सका। सूखी में पुल स्वीकृत होने के बावजूद नहीं बनना क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बना है।
- योगिता भट्ट, नकायल, गौलापार।
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बाढ़ आने पर राशन की किल्लत हो जाती है। बिजली, पानी के अभाव में काफी परेशानियां होती हैं। जानवर चुगने के लिए जंगल नहीं जा पाते हैं। जंगल गए जानवर घर आते समय नदी में बह जाते हैं। सरकार को जल्द से जल्द पुल का निर्माण करना चाहिए।
- माया भट्ट, नकायल, गौलापार।
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कई बार सूखी नदी में पुल बनाने के लिए मंत्रियों, अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। पुल स्वीकृति के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा रहा है। नदी के भू कटाव होने से लोगों की जमीन को भी खतरा बना हुआ है। मामले को कई बार बीडीसी बैठक में उठा चुका हूं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
- ललित प्रसाद आर्य, ग्राम प्रधान लछमपुर।
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सूखी नदी में स्वीकृत पुल का शिलान्यास 2013 में गौला पुल के साथ ही किया गया। पुल के शिलान्यास के नाम पर एक पत्थर जरूर लगा दिया गया है लेकिन निर्माण शुरू नहीं किया गया है। कई बार जिला पंचायत की बैठकों में नकैल पुल और बिजयपुर में काजवे का निर्माण शुरू कराने की मांग की गई है। अधिकारी आश्वासन देकर कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं।
- प्रकाश गरजौला, जिला पंचायत सदस्य, लाखनमंडी-चोरगलिया।