रामलीला मंचन के दौरान सजधज कर अभिनय करने वाले पात्र सभी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लेकिन, पात्रों को सजाने और उन्हें मंच में अभिनय करने के लिए तैयार करने वालों की ओर शायद ही किसी की नजर रहती हो।
रामलीला के पात्रों को तैयार करना एक विशेष कला तो है ही साथ ही यह कार्य काफी मेहनत का भी है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि मात्र दो घंटे की लीला का मंचन करने वाले पात्रों का मेकअप करने में पूरे चार घंटे का समय लगता है।
दिन की लीला का मंचन कराने की तैयारी दोपहर 12 बजे शुरू हो जाती है। मेकअप मैन नरेश गोस्वामी और विक्रम भाकुनी कलाकारों के मेकअप की जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। मेकअप मैन ने बताया कि रामलीला के पात्रों का मेकअप करते समय पहले मुद्रासन नामक पदार्थ से उनकी फेस मेकिंग की जाती है।
मुद्रासन सूखने के बाद गालों, आंखों, ठोढ़ी पर रूज लगाया जाता है। उसके बाद पाउडर से फिनिशिंग दी जाती है। हल्के गोंद के सहारे चेहरे में चमक लाने के लिए चमकी का प्रयोग किया जाता है। अंत में खड़े तिलक वाले पात्रों के माथे पर लाल रंग का ‘श्री’ और तिरछे तिलक वाले पात्रों के माथे पर पीले चंदन का त्रिकुंड बनाया जाता है।
अंत में पात्रों को वस्त्र, बाल, मुकुट, मालाएं आदि पहनाए जाते हैं। प्रत्येक कलाकार को तैयार करने में करीब 20 मिनट का समय लगता हे।
पहले ऐसे करते थे मेकअप
पूर्व में देवीदत्त पांडे और अशोक टंडन रामलीला कमेटी के मेकअप मैन के रूप में प्रसिद्ध थे। उन दिनों रोज आदि की व्यवस्था नहीं होने से जिंक आक्साइड को गोले के तेल में मिलाया जाता था। उसमें लाल रंग मिलाकर उसे गुलाबी बनाया जाता था। श्याम वर्ण के कलाकारों के लिए जिंक आक्साइड, गोले का तेल और नील मिलाकर श्याम रंग बनाया जाता था।