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Nainital News: इस माह दिन में नजर आएंगे ‘तारे’

Tue, 15 Apr 2025 02:14 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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नैनीताल। दिन में तारे नजर आने वाली कहावत इस माह सच होने जा रही है। 27 अप्रैल को शुक्र ग्रह बेहद चमकदार नजर आएगा। इसकी चमक इतनी ज्यादा होगी कि इसे सुबह के समय सूर्योदय के बाद भी देखा जा सकेगा। 26 अप्रैल की रात यह तेज चमक के साथ अर्ध चंद्र से बिल्कुल सटा होगा और आकर्षक युति बनाएगा। इस दिन शुक्र ग्रह सर्वाधिक चमकीला नजर आएगा। इसके बाद इतनी चमक के साथ यह नवंबर-2026 में ही दिखाई देगा।
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27 अप्रैल की सुबह शुक्र के साथ चंद्रमा, शनि, बुध और नेपच्यून भी आकाश में एक साथ आस-पास नजर आएंगे। शुक्र ग्रह में बहुत घने बादल होते हैं। इन बादलों के कारण यह सूर्य के प्रकाश का करीब तीन-चौथाई हिस्सा परावर्तित कर देता है। शुक्र ग्रह पूरे सौरमंडल का सर्वाधिक गर्म ग्रह है। ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण इसकी सतह का तापमान 462 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इससे बादलों में सल्फ्यूरिक एसिड की बूंदें और अम्लीय क्रिस्टल भी होते हैं। इनके प्रभाव और अत्यंत गर्म होने के कारण इससे अधिकतम प्रकाश परिवर्तित होता है। इस कारण शुक्र आकाश में सूर्य और चंद्रमा के बाद तीसरा सर्वाधिक चमकदार पिंड है। सूर्योदय के पहले तक और सूर्यास्त के तुरंत बाद भी सबसे पहले यही नजर आता है इसलिए इस ग्रह को सुबह का तारा या शाम का तारा भी कहा जाता है। शुक्र ग्रह पृथ्वी के सर्वाधिक निकट अपने अर्धचंद्राकार रूप में होता है और तभी सबसे ज्यादा चमकदार नजर आता है।

पृथ्वी से 20 करोड़ किमी और नजदीक आ जाएगा शुक्र ग्रह

शुक्र और पृथ्वी के बीच की अधिकतम दूरी लगभग 261 मिलियन किलोमीटर होती है। पृथ्वी के निकटतम होने पर शुक्र ग्रह पृथ्वी से लगभग 38 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर होता है। 27 अप्रैल को शुक्र ग्रह पृथ्वी से अपनी सर्वाधिक दूरी के मुकाबले लगभग 20 करोड़ किमी नजदीक होगा।
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आज से नजर आएगा उल्कापात, 22 को होगा चरम पर



आज रात से आकाश में उल्कापात के आकर्षक नजारे देखने को मिलेंगे, 22 अप्रैल को ये चरम पर होंगे। लिरिड उल्कापात लंबी अवधि के धूमकेतु सी 1861 जी 1 थैचर द्वारा छोड़े गए मलबे के कणों के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के बाद घर्षण से जल जाने के कारण नजर आता है। यह सबसे पुराना रिकॉर्ड किया गया उल्का बौछार है। इसे पहली बार लगभग 3200 वर्ष पहले 687 ईसा पूर्व में दर्ज किया गया था। हालांकि इस धूमकेतु की खोज अल्फ्रेड ई थैचर ने 5 अप्रैल 1861 को की थी। लिरिड उल्का बौछार 15 अप्रैल की रात से शुरू होकर 22 अप्रैल को अपने चरम पर पहुंचेगी। 22 अप्रैल की रात चंद्रमा लगभग 3 बजे तक क्षितिज से नीचे होगा इसलिए गहरे अंधेरे में उल्कापात बहुत ही स्पष्ट नजर आएगा। आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के मोहित जोशी ने बताया कि इस दौरान 20 उल्काएं प्रति घंटा तक नजर आएंगी।
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