संवाद न्यूज एजेंसी
हल्द्वानी/देहरादून। दृष्टिबाधित बच्ची के यौन शोषण के आरोपी श्याम सिंह धानक को शनिवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस मामले में उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग ने नैनीताल पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा ने बताया कि जांच में पता चला है कि जिस पीड़िता की शिकायत पर धानक पर पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है वह साल 2018 से यहां रह रही है।
उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डाॅ. गीता खन्ना ने कहा, राज्य में स्कूल और अस्पतालों को किस तरह के लोग खोल रहे हैं, सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। विजिलेंस से जांच के बाद ही इन्हें खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए, देखा जाना चाहिए कि कही यह लोग आपराधिक प्रवृत्ति के तो नहीं हैं। आयोग का तो यह तक मानना है कि इसके लिए मनोवैज्ञानिक जांच भी हो। इधर, पुलिस इस मामले में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है ताकि आरोपी के बचने की कोई गुंजाइश न रहे। पुलिस ने शनिवार को धानक को कोर्ट में पेश किया , जहां से उसे जेल भेज दिया गया। जिलाधिकारी ने भी मामले की गंभीरता देखते हुए बच्चों की जांच के लिए परीक्षण समिति गठित कर दी है।
शुक्रवार शाम दृष्टिबाधित संस्था के महासचिव श्याम धानक के खिलाफ पॉक्सो सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। एसपी सिटी हरबंश सिंह का कहना है कि मामले की शिकायत काफी पहले दर्ज हुई थी। हालांकि पुलिस ने बच्ची का मेडिकल कराने के बाद ही मुकदमा दर्ज किया था।
इतने गंभीर मामले की जांच में पुलिस को क्याें लगा डेढ़ महीना
पुलिस को डेढ़ माह पहले धानक के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत मिली थी। सवाल ये उठता है कि इतने गंभीर मामले में पुलिस की ओर से इतनी ढिलाई क्यों बरती गई? दिव्यांग बच्ची के मामले में पुलिस ने जांच करने में इतना वक्त क्यों लगाया। आरोप लग रहे हैं कि यौन शोषण के अलावा श्याम सिंह धानक बच्चियों को डराता धमका भी था। ताकि यौन शोषण का मामला बाहर न आने पाए।
दो अन्य बच्चियों से भी पूछताछ
पुलिस ने इस मामले में दो अन्य बच्चियों से भी पूछताछ की है। एसपी सिटी हरबंस सिंह ने बताया कि पुलिस की जांच के बाद जो तथ्य सामने आए हैं उसके आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ है। जो आरोप श्याम धानक पर लगे हैं उसे पॉक्सो में दुष्कर्म की श्रेणी में रखा जाता है। इसी आधार पर केस दर्ज किया।
एसएसपी बोले
संस्थान के अन्य बच्चों से भी बात की जानी है जिस पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई हुई है वह साल 2018 से यहां रह रही है।
- प्रहलाद नारायण मीणा, एसएसपी।
ऐसे हुआ धानक की घिनौनी करतूत का खुलासा
हल्द्वानी। दृष्टिबाधित बच्ची के साथ यौन शोषण का खुलासा आसान नहीं था जिस श्याम सिंह धानक की हनक सत्ता तक थी, हर सरकार और हर पार्टी के विधायक से लेकर मंत्री तक धानक की पहुंच थी।
वह व्यक्ति दृष्टिबाधित बच्ची का लंबे समय से यौन शोषण कर रहा था, लेकिन पीड़िता ने हिम्मत कर अपना दर्द सबसे पहले अपने परिवार से साझा किया। उसके बाद बच्ची और परिवार ने मिलकर धानक जैसे ताकतवर और घिनौनी करतूत करने वाले की सच्चाई समाज के सामने लाने का फैसला किया। बताया जाता है कि इसकी शिकायत एक आलाधिकारी से की गई लेकिन जांच में गंभीरता नहीं दिखी। मामले की पड़ताल के बाद पता चला है कि पहले पुलिस जांच को दबा रही थी। शुरुआती दिनों में जांच को बेहद धीमा किया गया था। बाद में जिले के पुलिस कप्तान बदल गए।
उन्होंने लंबित मामले निपटाने के सख्त आदेश दिए इसके तहत कार्रवाई हुई। नए एसएसपी पीएस मीणा ने मामले की जांच कराने का आदेश दिया। जांच में दृष्टिबाधित बच्ची की शिकायत सही पाई गई। इसके बाद पुलिस ने जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया। मुकदमे के बाद मेडिकल कराया गया और कोर्ट में बच्ची के बयान हुए। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
बच्ची की बहादुरी को सलाम : इस मामले में कार्रवाई बच्ची और उसके परिवार की हिम्मत के कारण संभव हो सकी। यह परिवार धानक के कृत्य पर चुप नहीं रहा। उसने एसएसपी के पास पहुंचकर अपनी
शिकायत रखी। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और धानक को जेल जाना पड़ा है।
पहले मोबिल ऑयल का कारोबारी फिर समाजसेवी और अब पॉक्सो का आरोपी
हल्द्वानी। पॉक्सो का आरोपी और शहर की नामचीन संस्थान का महासचिव श्याम सिंह धानक शुरुआती दिनों में कारोबारी था। काम नहीं चलने पर उसने समाजसेवा को अपना लिया था। इसके लिए एक संस्था गठित की और खुद उसका महासचिव बन बैठा और खूब नाम कमाया।
लोग बताते हैं कि करीब 25 साल पहले धानक मोबिल ऑयल का कारोबारी था। संभवत: वह किसी जापानी कंपनी के मोबिल ऑयल का डीलर था। बाद में वह काम बंद हो गया। लोगों का कहना है कि इसके बाद धानक ने कठघरिया क्षेत्र में डेयरी का कारोबार किया लेकिन वह भी नहीं चला।
खुद का बेटा भी दृष्टिबाधित
श्याम धानक का बड़ा बेटा भी दृष्टिबाधित है। उसकी शादी हो चुकी है। उसके बावजूद उसने दृष्टिबाधित बच्ची से यौन शोषण किया। आरोप है कि जब बच्ची मना करती थी उसके साथ मारपीट की जाती थी। पुलिस अन्य दो बच्चों के बयान ले रही है। बताया जा रहा है कि जल्द ही मामले में संस्थान के सभी बच्चों के बयान लिए जाएंगे। इस दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा कि संस्थान में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
पहले दबी जुबान होती थी चर्चा
जब संस्था के महासचिव की कलई खुल गई तो अब जो जुबान बंद थी, वह भी खुलने लगी है। चर्चा है कि संस्था के अंदर पढ़ने वाले बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता था, लेकिन धानक की रसूख की वजह से किसी की भी बोलने की हिम्मत नहीं होती थी। अगर शासन-प्रशासन पहले से इस संस्था पर कड़ी निगरानी रखता तो इस तरह का प्रकरण घटित नहीं हो पाता।
जरूरी नहीं कि जो शख्स जैसा दिखता है वह वैसा ही हो : मनोविज्ञानी
हल्द्वानी। मनोविज्ञानी डॉ. युवराज पंत ने बताया कि इस प्रकरण के बाद आमजन हैरान हो सकता है, लेकिन मनोविज्ञान के लिए यह प्रकरण नया नहीं हैं। मनोविज्ञान कहता है कि जो व्यक्ति समाज में खुद को जैसा दिखाता है, जरूरी नहीं कि वह असली जीवन में वैसा ही हो। कहा कि अगर कोई समाजसेवी है तो जरूरी नहीं कि वह असल जीवन में भी अच्छा इंसान हो।
जिलाधिकारी ने किया समिति का गठन
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। डीएम वंदना सिंह ने नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (नैब) नवाड़खेड़ा हल्द्वानी में संचालक के विरुद्ध शिकायत होने और पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई के मद्देनजर अधिकारियों की समिति का गठन किया है जो संस्थान में दृष्टिबाधित बालिकाओं के मानसिक, शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास का परीक्षण करेगी।
कमेटी में बाल कल्याण समिति नैनीताल की अध्यक्ष, जिला प्रोबेशन अधिकारी नैनीताल, जिला समाज कल्याण अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी हल्द्वानी के साथ ही सीएमओ की ओर से नामित एक मनोचिकित्सक को शामिल किया है। इनके अलावा मनोचिकित्सा के क्षेत्र में कार्य कर रहे एनजीओ भी रहेंगे। लालकुआं के तहसीलदार को सदस्य नामित करते हुए प्रशासनिक सहयोग के लिए कहा गया है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर यह समिति नैब का निरीक्षण कर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का परीक्षण करेगी और उनकी काउंसलिंग भी करेगी। समिति समय-समय पर निरीक्षण करते हुए यह भी सुनिश्चित करेगी कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास प्रभावित न हो। बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगी। समिति संस्थान द्वारा बनायी गयी आंतरिक शिकायत निवारण समिति की गतिविधियों का भी परीक्षण करेगी।
एक्टर से लेकर आमजन पहुंचते रहे हैं संस्थान में
हल्द्वानी। दृष्टिबाधित बच्चों के लिए बनाए गए संस्थान में सीएम से लेकर आमजन का भी हमदर्दी बतौर आनाजाना लगा रहता है। बॉलीवुड एक्टर भी यहां आते रहे हैं। नौकरशाह भी अक्सर आते हैं। लोगों का संस्थान और यहां रह रहे बच्चों के प्रति काफी स्नेह है। कई लोग अपना जन्मदिन मनाने संस्थान में जाते हैं और बच्चों को उपहार बांटते हैं। संस्था को भी दान पुण्य करते हैं। कम समय में संस्थान ने बड़ा नाम कमा लिया। संवाद
सात अक्तूबर के दौरे में क्यों नहीं मिली खामी
हल्द्वानी। राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष ज्योति साह मिश्रा बीती सात अक्तूबर को इस संस्था में औचक निरीक्षण पर गईं थीं। निरीक्षण की फोटो भी जारी की गईं। साथ ही बताया गया कि उन्होंने यहां 120 बच्चों की समस्याएं सुनी। इस दौरे के चार दिन बाद ही संस्था महासचिव पर यहां अध्ययनरत बच्ची के साथ यौन शोषण के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। जिस समय वह दौरे पर थीं, उस समय श्याम धानक की इस प्रकरण में गोपनीय जांच चल रही थी। ज्योति साह मिश्रा ने बच्चों से बात तो की लेकिन वह उनके अंदर की पीड़ा को नहीं जान सकीं। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हल्द्वानी/देहरादून। दृष्टिबाधित बच्ची के यौन शोषण के आरोपी श्याम सिंह धानक को शनिवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस मामले में उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग ने नैनीताल पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा ने बताया कि जांच में पता चला है कि जिस पीड़िता की शिकायत पर धानक पर पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है वह साल 2018 से यहां रह रही है।
उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डाॅ. गीता खन्ना ने कहा, राज्य में स्कूल और अस्पतालों को किस तरह के लोग खोल रहे हैं, सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। विजिलेंस से जांच के बाद ही इन्हें खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए, देखा जाना चाहिए कि कही यह लोग आपराधिक प्रवृत्ति के तो नहीं हैं। आयोग का तो यह तक मानना है कि इसके लिए मनोवैज्ञानिक जांच भी हो। इधर, पुलिस इस मामले में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है ताकि आरोपी के बचने की कोई गुंजाइश न रहे। पुलिस ने शनिवार को धानक को कोर्ट में पेश किया , जहां से उसे जेल भेज दिया गया। जिलाधिकारी ने भी मामले की गंभीरता देखते हुए बच्चों की जांच के लिए परीक्षण समिति गठित कर दी है।
शुक्रवार शाम दृष्टिबाधित संस्था के महासचिव श्याम धानक के खिलाफ पॉक्सो सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। एसपी सिटी हरबंश सिंह का कहना है कि मामले की शिकायत काफी पहले दर्ज हुई थी। हालांकि पुलिस ने बच्ची का मेडिकल कराने के बाद ही मुकदमा दर्ज किया था।
इतने गंभीर मामले की जांच में पुलिस को क्याें लगा डेढ़ महीना
पुलिस को डेढ़ माह पहले धानक के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत मिली थी। सवाल ये उठता है कि इतने गंभीर मामले में पुलिस की ओर से इतनी ढिलाई क्यों बरती गई? दिव्यांग बच्ची के मामले में पुलिस ने जांच करने में इतना वक्त क्यों लगाया। आरोप लग रहे हैं कि यौन शोषण के अलावा श्याम सिंह धानक बच्चियों को डराता धमका भी था। ताकि यौन शोषण का मामला बाहर न आने पाए।
दो अन्य बच्चियों से भी पूछताछ
पुलिस ने इस मामले में दो अन्य बच्चियों से भी पूछताछ की है। एसपी सिटी हरबंस सिंह ने बताया कि पुलिस की जांच के बाद जो तथ्य सामने आए हैं उसके आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ है। जो आरोप श्याम धानक पर लगे हैं उसे पॉक्सो में दुष्कर्म की श्रेणी में रखा जाता है। इसी आधार पर केस दर्ज किया।
एसएसपी बोले
संस्थान के अन्य बच्चों से भी बात की जानी है जिस पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई हुई है वह साल 2018 से यहां रह रही है।
- प्रहलाद नारायण मीणा, एसएसपी।
ऐसे हुआ धानक की घिनौनी करतूत का खुलासा
हल्द्वानी। दृष्टिबाधित बच्ची के साथ यौन शोषण का खुलासा आसान नहीं था जिस श्याम सिंह धानक की हनक सत्ता तक थी, हर सरकार और हर पार्टी के विधायक से लेकर मंत्री तक धानक की पहुंच थी।
वह व्यक्ति दृष्टिबाधित बच्ची का लंबे समय से यौन शोषण कर रहा था, लेकिन पीड़िता ने हिम्मत कर अपना दर्द सबसे पहले अपने परिवार से साझा किया। उसके बाद बच्ची और परिवार ने मिलकर धानक जैसे ताकतवर और घिनौनी करतूत करने वाले की सच्चाई समाज के सामने लाने का फैसला किया। बताया जाता है कि इसकी शिकायत एक आलाधिकारी से की गई लेकिन जांच में गंभीरता नहीं दिखी। मामले की पड़ताल के बाद पता चला है कि पहले पुलिस जांच को दबा रही थी। शुरुआती दिनों में जांच को बेहद धीमा किया गया था। बाद में जिले के पुलिस कप्तान बदल गए।
उन्होंने लंबित मामले निपटाने के सख्त आदेश दिए इसके तहत कार्रवाई हुई। नए एसएसपी पीएस मीणा ने मामले की जांच कराने का आदेश दिया। जांच में दृष्टिबाधित बच्ची की शिकायत सही पाई गई। इसके बाद पुलिस ने जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया। मुकदमे के बाद मेडिकल कराया गया और कोर्ट में बच्ची के बयान हुए। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
बच्ची की बहादुरी को सलाम : इस मामले में कार्रवाई बच्ची और उसके परिवार की हिम्मत के कारण संभव हो सकी। यह परिवार धानक के कृत्य पर चुप नहीं रहा। उसने एसएसपी के पास पहुंचकर अपनी शिकायत रखी। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और धानक को जेल जाना पड़ा है।
पहले मोबिल ऑयल का कारोबारी फिर समाजसेवी और अब पॉक्सो का आरोपी
हल्द्वानी। पॉक्सो का आरोपी और शहर की नामचीन संस्थान का महासचिव श्याम सिंह धानक शुरुआती दिनों में कारोबारी था। काम नहीं चलने पर उसने समाजसेवा को अपना लिया था। इसके लिए एक संस्था गठित की और खुद उसका महासचिव बन बैठा और खूब नाम कमाया।
लोग बताते हैं कि करीब 25 साल पहले धानक मोबिल ऑयल का कारोबारी था। संभवत: वह किसी जापानी कंपनी के मोबिल ऑयल का डीलर था। बाद में वह काम बंद हो गया। लोगों का कहना है कि इसके बाद धानक ने कठघरिया क्षेत्र में डेयरी का कारोबार किया लेकिन वह भी नहीं चला।
धानक का बड़ा बेटा भी दृष्टिबाधित है। उसके उपचार और शिक्षा संबंधी किए गए कामों से उसके दिमाग में हल्द्वानी में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए संस्थान खोलने का विचार आया था। संवाद
खुद का बेटा भी दृष्टिबाधित
श्याम धानक का बड़ा बेटा भी दृष्टिबाधित है। उसकी शादी हो चुकी है। उसके बावजूद उसने दृष्टिबाधित बच्ची से यौन शोषण किया। आरोप है कि जब बच्ची मना करती थी उसके साथ मारपीट की जाती थी। पुलिस अन्य दो बच्चों के बयान ले रही है। बताया जा रहा है कि जल्द ही मामले में संस्थान के सभी बच्चों के बयान लिए जाएंगे। इस दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा कि संस्थान में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
पहले दबी जुबान होती थी चर्चा
जब संस्था के महासचिव की कलई खुल गई तो अब जो जुबान बंद थी, वह भी खुलने लगी है। चर्चा है कि संस्था के अंदर पढ़ने वाले बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता था, लेकिन धानक की रसूख की वजह से किसी की भी बोलने की हिम्मत नहीं होती थी। अगर शासन-प्रशासन पहले से इस संस्था पर कड़ी निगरानी रखता तो इस तरह का प्रकरण घटित नहीं हो पाता।
जरूरी नहीं कि जो शख्स जैसा दिखता है वह वैसा ही हो : मनोविज्ञानी
हल्द्वानी। मनोविज्ञानी डॉ. युवराज पंत ने बताया कि इस प्रकरण के बाद आमजन हैरान हो सकता है, लेकिन मनोविज्ञान के लिए यह प्रकरण नया नहीं हैं। मनोविज्ञान कहता है कि जो व्यक्ति समाज में खुद को जैसा दिखाता है, जरूरी नहीं कि वह असली जीवन में वैसा ही हो। कहा कि अगर कोई समाजसेवी है तो जरूरी नहीं कि वह असल जीवन में भी अच्छा इंसान हो।
जिलाधिकारी ने किया समिति का गठन
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। डीएम वंदना सिंह ने नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (नैब) नवाड़खेड़ा हल्द्वानी में संचालक के विरुद्ध शिकायत होने और पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई के मद्देनजर अधिकारियों की समिति का गठन किया है जो संस्थान में दृष्टिबाधित बालिकाओं के मानसिक, शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास का परीक्षण करेगी।
कमेटी में बाल कल्याण समिति नैनीताल की अध्यक्ष, जिला प्रोबेशन अधिकारी नैनीताल, जिला समाज कल्याण अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी हल्द्वानी के साथ ही सीएमओ की ओर से नामित एक मनोचिकित्सक को शामिल किया है। इनके अलावा मनोचिकित्सा के क्षेत्र में कार्य कर रहे एनजीओ भी रहेंगे। लालकुआं के तहसीलदार को सदस्य नामित करते हुए प्रशासनिक सहयोग के लिए कहा गया है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर यह समिति नैब का निरीक्षण कर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का परीक्षण करेगी और उनकी काउंसलिंग भी करेगी। समिति समय-समय पर निरीक्षण करते हुए यह भी सुनिश्चित करेगी कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास प्रभावित न हो। बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगी। समिति संस्थान द्वारा बनायी गयी आंतरिक शिकायत निवारण समिति की गतिविधियों का भी परीक्षण करेगी।
एक्टर से लेकर आमजन पहुंचते रहे हैं संस्थान में
हल्द्वानी। दृष्टिबाधित बच्चों के लिए बनाए गए संस्थान में सीएम से लेकर आमजन का भी हमदर्दी बतौर आनाजाना लगा रहता है। बॉलीवुड एक्टर भी यहां आते रहे हैं। नौकरशाह भी अक्सर आते हैं। लोगों का संस्थान और यहां रह रहे बच्चों के प्रति काफी स्नेह है। कई लोग अपना जन्मदिन मनाने संस्थान में जाते हैं और बच्चों को उपहार बांटते हैं। संस्था को भी दान पुण्य करते हैं। कम समय में संस्थान ने बड़ा नाम कमा लिया। संवाद
सात अक्तूबर के दौरे में क्यों नहीं मिली खामी
हल्द्वानी। राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष ज्योति साह मिश्रा बीती सात अक्तूबर को इस संस्था में औचक निरीक्षण पर गईं थीं। निरीक्षण की फोटो भी जारी की गईं। साथ ही बताया गया कि उन्होंने यहां 120 बच्चों की समस्याएं सुनी। इस दौरे के चार दिन बाद ही संस्था महासचिव पर यहां अध्ययनरत बच्ची के साथ यौन शोषण के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। जिस समय वह दौरे पर थीं, उस समय श्याम धानक की इस प्रकरण में गोपनीय जांच चल रही थी। ज्योति साह मिश्रा ने बच्चों से बात तो की लेकिन वह उनके अंदर की पीड़ा को नहीं जान सकीं। संवाद