क्षेत्र में पिछले 43 दिनों से आतंक का पर्याय बनी बाघिन विभाग की पकड़ से बाहर है। इससे ग्रामीणों में भी दहशत, आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मंगलवार की सुबह विभाग ने आदमखोर बाघिन को पकड़ने के लिए रणनीति बनाकर अभियान चलाया, लेकिन विभाग को कोई खासी सफलता नहीं मिली, जिससे विभाग की सारी रणनीति धरी रह गई और बाघिन एक बार फिर विभाग को चकमा देकर निकल गई। इस विफलता के कारण विभाग के अभियान पर अब सवालिया निशान भी उठने लगे हैं।
मंगलवार को विभाग द्वारा कैमरा ट्रैप चेक किया गया। उसमें बाघिन का फोटो नहीं मिला तो नालों में गश्त की गई। वहां उसके पगमार्क मिले जबकि सोमवार को उस क्षेत्र में मचान बना दो शिकारियों के साथ ही बकरा, पिंजरा, कैमरा ट्रैप लगाए गए थे।
इसके बावजूद चालाक आदमखोर बाघिन कुछ ही दूरी से नाला पार कर गन्ने के खेत में चली गई और विभाग के सारे तामझाम धरे रह गए। जिससे ग्रामीणों में विभाग के खिलाफ आक्रोश बढ़ने लगा है वहीं विभाग चालाक बाघिन के सामने बौना साबित हो रहा है।
एसडीओ कलम सिंह बिष्ट ने बताया कि मंगलवार को समय से पहले ही चार बजे चार जगह मचान बना शिकारियों को बैठा दिया गया है। बाघिन की खोजबीन के लिए गोरखपुर में आम, लीची के बगीचों समेत गन्ने के खेतों में भी सर्च अभियान चलाया गया लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली।
22 को कार्बेट बंद कराने के लिए अभियान जारी
आदमखोर बाघिन को मारने, हिंसक जानवरों को मारने का अधिकार जनता को दिलाने आदि मांगों को लेकर संघर्ष समिति ने जनसंपर्क अभियान चलाया है। इसके लिए मंगलवार को ग्राम गौजानी, सेमलखलिया, कानिया में ग्रामीणों की बैठक हुई।
इसमें समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने क्षेत्र की जनता से 22 अक्तूबर को कार्बेट पार्क बंद कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भागीदारी का आह्वान किया। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार ने उनके जंगलों पर परंपरागत अधिकार खत्म कर दिया है।
ग्रामीणों के जंगलों में पशु चराने, वहां से घास, सूखी लकड़ियां आदि अपनी जरूरत की वस्तुओं को लाने का अधिकार बहाल किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग बाघिन को मारने के नाम पर सिर्फ दिखावा कर रहा है।
बैठक में सरिता भट्ट, गोविंद अधिकारी, रूप सिंह नेगी, तारा नेगी, मनोज नेगी, किशोरी लाल, पूरन सती, देवेंद्र रौतेला, विमला तड़ियाल, प्रभात ध्यानी, मोहन पटवाल, मनमोहन अग्रवाल, पीसी जोशी, महेश जोशी थे।